* रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एनपीएस एवं ओपीएस के विकल्प स्वरूप शपथ पत्र लिया जाकर दोनों में से किसी एक के चयन की घोषणा की गई है तथा विकल्प प्रस्तुत न करने पर वेतन आहरण पर रोक या सरकार स्वेच्छा से किसी एक का चयन कर देगी और यह विकल्प अंतिम होगा। इतने कम समय में कर्मचारियों पर किए जा रहे दबाव को कर्मचारी संघ ने एनपी एस ओपीएस केंद्र और राज्य के झगड़े में भंवर जाल में फंस गया है। कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने कहा है कि साढ़े 5 लाख कर्मचारियों में इस बात का आक्रोश है कि 2004 के बाद एनपीएस लागू करते समय कोई विकल्प कोई सहमति न लेकर केंद्र और राज्य ने हिटलरशाही का परिचय दिया था। अब 18 वर्ष की जमा राशि एवं उस पर चक्रवृद्धि ब्याज न मिलने एनएसडीएल कंपनी द्वारा प्रदेश के 17,500 करोड रुपए को हजम करने से कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। अभी भी कर्मचारी यह सशंकित हैं कि एनपीएस और ओपीएस में किसका चयन किया जाए। राज्य सरकार पेंशन देने की घोषणा की है किंतु वह भी आरक्षण के समान विवाद में फंसा हुआ है। कर्मचारियों का 18 वर्ष का जमा राशि पहले ही डूब चुका है। अब ओपीएस लागू करने पर अपनी राशि जमा करने का निर्देश कर्मचारियों में अविश्वसनीयता का परिचायक हो रहा है । श्री झा ने प्रदेश के कर्मचारियों से अपील की है कि जिनकी सेवा अवधि 10 वर्ष या उससे कम हो उन्हें एनपीएस तथा 10 वर्ष से अधिक होने पर ओपीएस का चयन करना चाहिए। शासकीय सेवकों से कभी शपथ पत्र नहीं लिया गया। केवल विकल्प का फॉर्म भरा जाता है। स्वतंत्र भारत के छत्तीसगढ़ में पहली बार शपथ पत्र मांगना कर्मचारियों को धोखे में रखना है। ऐसे कर्मचारी जिसका 10 वर्ष सेवाकाल हो इसका अर्थ केवल जिन कर्मचारियों ने 53 वर्ष की उम्र विशेषकर जो महिलाएं अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की है। वह 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगी। उनका 10 वर्ष सेवाकाल पूर्ण नहीं होगा। ऐसे नगण्य कर्मचारी जिनकी सेवाए 10 वर्ष नहीं होगी। उन्हें एनपीएस का चयन करना चाहिए। बाकी 98% शासकीय सेवकों को ओपीएस का विकल्प ही भरना चाहिए। कुल मिलाकर पहले ही पैसा डूब चुका है और कर्मचारीओ से पैसा लेकर ही उन्हें पेंशन दिए जाने की योजना सरकार ने बनाई है।
