बच्चों तक को नहीं बख्शा विधायक अरुण वोरा ने,उन्हें तक बनाया राजनीति का शिकार-प्रतीक उमरे

दुर्ग (सतीश पारख) शहर के विधायक अरुण वोरा ने दुर्ग की जनता तो जनता, दुर्ग शहर के बच्चों के साथ भी झूठी राजनीति करने से गुरेज नहीं किया,दुर्ग शहर के हृदयस्थल इंदिरा मार्केट में स्थित महात्मा गांधी स्कूल की इमारत पूरी तरह से बदहाली का शिकार हो चुकी हैं।पूरे ढांचे के साथ ही कमरों की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।छत कब गिर जाए,कुछ कहा नहीं जा सकता है।लेकिन,छत के नीचे बैठकर सैकड़ों की संख्या में मासूम पढ़ाई कर रहे हैं।मासूमों की जिंदगी पर मौत का संकट मंडरा रहा है।ये बात विधायक अरुण वोरा जी को 8 साल से पता है और वो आठ साल पहले से मांग भी कर रहे है,फंड भी देने की बात कही लेकिन पैसा गया कहा उसका कोई अता पता नहीं।गनीमत है भगवान की कृपा से आठ साल से छत नहीं गिरी। उक्त बातें पूरे प्रमाण के साथ दुर्ग निगम के पूर्व एल्डरमैन डॉ प्रतीक उमरे ने कही।

उन्होंने बताया की 12 दिसंबर 2022
को
दुर्ग शहर के माननीय फेकोलॉजिस्ट विधायक ने चिरपरिचित अंदाज में हेडिंग के साथ विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि 500 करोड़ की विशेष राशि उन्होंने स्कूलों के संधारण के लिये आबंटित कराया,राशि विशेष इसलिए है कि राशि मिली ही नहीं और विधायक जी अगर राशि आपने लाया तो बताइए कहाँ संधारण हुआ है,इसमें अपने मोहन नगर और पद्मनाभपुर वाले घर को नही गिनना है,उसके अतिरिक्त और कही वो जो आप 500 करोड़ लाये हो उसका हिसाब बता दो।नहीं बता पाओगे गारन्टी के साथ बोल रहा हूँ।आपके दो चार बचे हुए समर्थक अब मेरे को फिर परेशान करेंगे कि आप के पास क्या सबूत है।तो प्रमाण उपलब्ध है।
उन्होंने बताया की
25 नवंबर 2021 को

फिर विधायक अरुण वोरा ने ऐसे ही मुँह से ही शिक्षा के लिए 2 करोड़ 14 लाख की राशि स्वीकृत करा दिया।मतलब कुछ भी,इतना झूठ बोलने की हिम्मत को मेरा हुनर सलाम है,उसमें भी आपने 5 लाख की राशि महात्मा गांधी स्कूल को संधारण के लिये दिया ऐसा आपने अपनी विज्ञप्ति में लिखा है,कहीं आप अपने घर व अन्य सम्पत्तियों को महात्मा गांधी स्कूल समझ कर खर्च तो नहीं कर रहे,क्योंकि आज तक स्कूल की हालत जर्जर है जिसको जब आपकी सरकार आएगी तो क्या क्या कर दोगे बोलते थे।कही ऐसा तो नही है कि हम लोग छत्तीसगढ़ी में बोलते है और आपको छत्तीसगढ़ी आता नही करके भाव समझ नहीं पा रहे हो,खैर फिर आपके उन चार समर्थकों के लिये प्रमाण उपलब्ध है।

शहर की जनता से निगम वसूलता है शिक्षा उपकर

डॉ प्रतीक उमरे ने कहा की समझ ये नहीं आता की दुर्ग नगर निगम को सरकारी स्कूलों के मेंटेनेंस के लिए फंड की दिक्कत क्यो हैं जबकि यह काम शिक्षा उपकर से मिलने वाली राशि से किया जा सकता है।निगम को विभिन्न शिक्षण संस्थानों से एक प्रतिशत शिक्षा उपकर मिलता है। इस राशि से निगम मेंटेनेंस कर सकता है।इस राशि का क्या उपयोग हो रहा है निगम के अधिकारी तो दूर महापौर तक नहीं जानते।क्योंकि निरीक्षण के नाम पर उंगली दिखाकर फोटोशूट कराने में महापौर जी को अलग टाईप का मजा आ रहा है।”फोकट में पाए, ता मरत ले खाए” वाला बात हो गया है, खैर छत्तीसगढ़ी में है आपको समझ नहीं आएगा महापौर जी आप आराम से उंगलीबाजी कीजिए, आप को कोई कुछ भी नहीं बोलेगा, क्योंकि आपको दुर्ग की जनता ने नही चुना है।

आगे कहा की विधायक जी को लगता है दुर्ग की जनता तो बेवकूफ है कुछ भी बोलूंगा 2 दिन में सब भूल जाएंगे,सही लगता है आपको,आप हमलोगों को सालों से बना रहे हो ठीक है सब भूल जाएंगे,पर क्या है बात हमारी है करके भूल जाते थे,लेकिन इस बार नहीं भूलेंगे,ना ही आपको भूलने देंगे।क्या है आपको फर्क नहीं पड़ता होगा क्योंकि वो बच्चे आपके हैं नहीं,लेकिन मेरे को पड़ता हैं और कुछ भी हो जाए स्कूल का मरम्मत तो करना पड़ेगा।ऐसे या वैसे,क्योंकि किसी भी बच्चे से साथ दुर्घटना घटी,तो सबसे पहला केस आपके ऊपर करूँगा। नगर निगम दुर्ग के पूर्व एल्डरमैन डॉ प्रतीक उमरे ने विधायक दुर्ग शहर पर निशाना दागते हुवे कहा की
विधायक जी कहते है दुर्ग मेरा परिवार है तो उस नाते मैं भी परिवार का सदस्य हूं इसलिए जनता को धोखा देना बंद करें ।अब जनता सब समझने लगी है अब आपके झूठ और बहकावे पर भरोसा करने वाली नही है ।

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