आशा शर्मा की रिपोर्ट……
धमतरी जिले के प्रसिध्द ऐतिहासिक, पौराणिक व धार्मिक स्थलों में से एक है भीमा कोटेश्वर महादेव का स्वयंभू शिवलिंग। जो धमतरी- नगरी रोड में स्थित सिंगपुर से 10 किलो मीटर आगे ग्राम- पंचायत कोटभर्री, विकासखंड- नगरी, जिला- धमतरी, के अंतर्गत प्रकृति के मनोरम दृश्यों व सिहावा अंचल के जंगलों के मध्य स्थित है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार- यह क्षेत्र नागकुंजर वन के अंतर्गत आता है जो कि सप्त ऋषियों में से एक पुलस्त ऋषि की तपो भूमि है। ऐसा कहा जाता है कि सतयुग में के समय जब समुद्र मंथन हुआ तब उसमें से कालकुट विष निकले तब उस कालकुट विष को भगवान शिव पी गए और अपने कंठ में रोक करके रखा और उस विष की ज्वलंत शक्ति को शांत करने जब भगवान शिव अमरनाथ जा रहे थे तो इसी मार्ग से होकर गुजर रहें तभी इसी जगह पर भगवान शिव अचेतन रूप में आ गए फिर सृष्टि का संचालन,कालचक्र पूरा रुक गया फिर सभी देवी- देवताओं ने नारद जी के कहने पर माता पार्वती की आराधना किया और माता पार्वती तारा के रूप में आ करके प्रगटी और ज्वलंत शक्ति को शांत किया और भगवान शिव फिर चेतन अवस्था मे आया। फिर सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव जी से अनुरोध किया कि प्रभु आप जगह पर एक रूप विराजमान रहों तब से आज तक भगवान इस जगह पर स्थित है।
आदिम संस्कृति के अनुसार:-
ऐसा भी कहा गया है कि इस भीमा कोटेश्वर शिवलिंग को भगवान शिव के 88 अवतारों में से 42 अवतार कहा जाता है।
इसका वर्णन:-
इसका संक्षिप्त वर्णन रामचरित मानस के लंका कांड के दोहा क्रमांक 119 के प्रथम चौपाई में और इसका विस्तृत वर्णन स्कन्द महापुराण के रामेश्वरम खंड के कोटी तीर्थ में है।
पुराणों के अनुसार:- त्रेता युग मे भगवान राम जब वनवास के लिए निकले थे तब इस क्षेत्र में 10 साल तक रुके रहे। भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त कर यहाँ पर आए और इस लिंग की पूजा आराधना किया। त्रेता युग मे इस लिंग की पूजा भगवान राम, रावण, एवं परसुराम जी तीनो ने किया ऐसा कहा जाता है।
ऐसा भी कहा जाता है कि वहाँ पर जो सात धाराएं है उसको भगवान राम ने अपने धनुष बाण से प्रगट किया था जिसे कोटि गंगा भी कहा जाता है जो शिवलिंग के मध्य शुरू में ही स्थित है।
यहाँ होने वाले विभिन्न चमत्कार:-
ऐसा कहा जाता है कि प्रकट्योत्सव से समय शिवलिंग अपने स्थान से दूसरे स्थान पर गोल-गोल घूमते पास के नदी के संगम तक चले गए थे फिर वहाँ के लोगो के द्वारा अर्जी- विनती और प्रार्थना के बाद अपने स्थान में पुनः आया।
- शिवलिंग पर गाय के दूध चढ़ाने से कभी – कभी दूध का रंग नीला हो जाना।
*शिवलिंग से कुछ ही दूर में इच्छाधारी नाग-नागिन का प्रत्यक्ष आना और श्रद्धालुओं को समय- समय पर दर्शन देना।
*पूजा के दौरान हाथों में फूल और चावल का आ जाना।
*शिवलिंग का हीलना और हीलकर जमीन से 3 इंच गेपिंग बनाकर वहाँ से प्रकाश का निकलना और सतरंगी की तरह पूरे क्षेत्र को प्रकाशित करना
*किसी भक्त के तीसरे नेत्र को खोल कर प्रत्यक्ष होने पा प्रमाण देना।
*शिवलिंग का अब तक 1 से डेढ़ फीट तक बढ़ना और ऐसा भी प्रमाणित है कि यहाँ आकर माँगने से हर मनोकामना भी पूर्ण होता है।
*विदेशी दर्शणार्थी*
ऐसा कहा जाता है कि अब तक 11 देशों जैसे- अमेरिका, यूरोप, बेल्जियम, रसिया, श्रीलंका, हॉलैंड, इंग्लैंड, नेपाल, बांग्लादेश के लोग दर्शन करने आ गए है। वैज्ञानिक अध्ययन वहाँ के पुजारी जी बताते है कि बैंगलौर से वैज्ञानिकों की टीम भी शोध करने आ गयी है।
मड़ाई- मेला, महोत्सव
भीमा कोटेश्वर महादेव में तो ऐसे हमेशा ही श्रद्धलुओं का आना जाना रहता है पर पूरे सावन माह ने बोलबम वाले जल चढ़ाने हज़ारो की संख्या में आते है।
*महाशिवरात्रि के समय यहाँ भव्य मड़ाई- मेले का आयोजन होता है
*19,20 और 21मई को प्रकट्योत्सव मनाने के दिन भी मड़ाई- मेले और महोत्सव का आयोजन होता है।
