केशव शर्मा देवरी बंगला,,
देवरीबंगला / सुरेगांव पुलिस ने मांगी गई रकम नही देने पर थाना में ग्राम सुरसुली के टुमनलाल साहू को बेदम पीटा। उसके पास रखे 8700 रूपये लूट लिए एवं उसे शराब एवं गांजा के केस मे जेल भेजने की धमकी दी। केस नही बनाने के लिए एक लाख की मांग तथा राशि देना कबूला तब उसे थाने से जाने दिया गया। पुलिस कर्मियो ने युवक को इतना पीटा कि उसे गंभीर हालत मे अस्पताल मे भर्ती करना पड़ा। अस्पताल मे युवक जीवन मौत के बीच सघर्ष कर रहा है। युवक एवं उनके परिजनो को उस पर जानलेवा हमले की आशंका है। पीड़ित की हालत बेहद चिन्ताजनक है। उसका भिलाई के एक निजी अस्पताल मे इलाज चल रहा है, 15 दिसंबर को की गई मारपीट एवं पुलिस कर्मियो द्वारा दी गई कथित धमकी के बाद से युवक एवं उसके परिजन घबराएं हुएं है, वह सारी रात दर्द एवं भय के कारण नही सो सका है, युवक का ईलाज कर रहे डॉक्टरो ने बताया कि युवक के शरीर मे जख्म के निशान है एवं उसे अंदरूनी चोट भी लगी है, युवक की स्थिति नाजूक है। टुमनलाल साहू ने लिखित बयान मे बताया वह ठेकेदार के पास काम करता है, सुरेगांव थाना प्रभारी अमित तिवारी ने ठेकेदारी व जेसीबी चलाने के काम करने के बदले ठेकेदार से दो माह की बकाया राशि की मांग की। युवक ने बताया कि मेरे बार बार मना करने के बाद भी थाना प्रभारी मुझपर रूपये लाने का दबाव बना रहा था, मैने असमर्थता व्यक्त की तो थाना प्रभारी एवं उनके अन्य पुलिस कर्मियो ने मुझे बहुत मारा। पुलिस वालो ने मुझे एवं मै जिसके पास काम करता हूं उसे भी शराब एवं गांजा के मामलो मे फंसाने की धमकी दी एवं पुलिस कर्मियो को दोनो के लिए 4 पेटी शराब एवं गांजा की व्यवस्था करने कहा। जिससे मै बेहद डर गया एवं एक लाख देने को तैयार हो गया। जानलेवा हमले की आशंका :- घटना से युवक के परिजन भी डरे हुए है, उन्हे आशंका है कि उन्हे झूठे मामले मे फंसाकर जेल भेज देंगे। युवक की पिटाई को देखकर युवक के परिजनो को उस पर जानलेवा हमले होने की भी आशंका है। उनका दावा है कि मारपीट करने एवं मामले मे क्षेत्र के पत्रकार के पहुंच जाने के बाद पुलिस विभाग स्वयं को घिरता देख अपने बचाव मे लगातार झूठी कहानी बनाकर सारा दोष युवक पर डाल उसके खिलाफ झूठे केस कायम करने का प्रयास कर रहा है। सुरेगांव मे पदस्थ थाना प्रभारी अमित तिवारी को विभाग के उच्च कार्यालय का संरक्षण प्राप्त है, अमित तिवारी बीते लगभग चार साल से सुरेगांव थाना मे ही पदस्थ है, इन चार सालो मे बालोद पुलिस अधीक्षको द्वारा दो बार स्थानांतरण किया गया था, लेकिन दोनो बार ही उसने अपना स्थानांतरण रूकवा लिया था। बड़ा सवाल है कि एक ही व्यक्ति को क्यो लंबे समय तक एक ही थाना मे पदस्थ किया गया। इससे मामने मे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।

