ग्रामीण बसाहट क्षेत्रों में आदर्श सड़क,बहुमंजिला इमारत में पीएम आवास सहित ग्रामीण मास्टर प्लान लागू करने का दिया सुझाव – भारद्वाज

दुर्ग। भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय बजट 2023-24 के लिए www.mygov.in के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किया गया है जिसपर छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के सलाहकार किशोर कुमार भारद्वाज ने सुझाव दिया है कि 1. शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए मास्टर प्लान व्यवस्था को अनिवार्य कर शामिल किया जावे चूंकि दूरगामी विकास कार्यों हेतु मास्टर प्लान के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों का विकास बाधित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय व निजी निर्माण कार्य अभियांत्रिकी रूप से सुव्यवस्थित स्थानों पर नहीं हो पा रहे जिससे सैकड़ों समस्याओं से ग्रामीणों को जुझना पड़ रहा है और विकास कार्य विनाश कार्य साबित हो रहे है। 2. ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श सड़क/मार्ग का मापदंड सुनिश्चित किया जावे चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों के बसाहटों पर आदर्श सड़क मार्ग का मापदंड न होने के साथ साथ अतिक्रमण एक चुनौतीपूर्ण समस्या है जिसके कारण ग्रामीण सड़क मार्ग बहुत सकरे होते जा रहे है, और आवागमन बाधित होते जा रहे है। कृषि व्यवसायिक एवं सामान्य परिवहन के संसाधनों का सकरे ग्रामीण सड़क मार्ग में संचालन बाधित होने से रोजमर्रा के जीवन प्रभावित हो रहा है तथा आपातकाल स्थिति में एम्बुलेंस, फायरब्रिगेड पुलिस आदि के वाहनों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 3. प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारत में आवास देने की सुविधा का प्रावधान सुनिश्चित किया जावे चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनांतर्गत नवीन आवासीय भूखंड बढ़ने से पशु चारागाह सहित भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण निर्माण कार्यो (स्कूल, महाविद्यालय, अस्पताल, क्रिडापरिसर व अन्य शासकीय भवनों) के लिए पर्याप्त भू खंड की कमी हो रही है।
भारद्वाज ने बताया कि राष्ट्र के 72.2 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत है,महज शहरी क्षेत्रों के सुव्यवस्थित विकास से राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती ग्रामीण क्षेत्रों को भी सुव्यवस्थित रूप से विकसित करना आवश्यक है। केन्द्र व राज्य सरकार के बजट का सर्वाधिक धन ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए उपयोग किया जा रहा है फिर भी परीणाम संतोषजनक नहीं आ रहा कारण सिर्फ कार्यों का सुव्यवस्थित ना होना ही है और ग्रामीण निकायों के शासकीय कर्मचारियों व निर्वाचित पदाधिकारियों में प्रशिक्षण का अभाव है।

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