पाटन। ग्राम सेलूद बजरंग चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा के माध्यम से बाल विदुषी शीघ्रता त्रिपाठी ने बतलाया कि धर्म का किसी व्यक्ति विशेष या स्थान से कोई संबंध नही है जो व्यक्ति असुविधा अपनी ओर रखकर सुविधा समाज के लिये रखता है वही धर्म का वास्तविक प्रचारक है। धार्मिक स्वयं को कहना और उस धार्मिकता में डूब के रहना दोनो अलग विषय है।
भागवत कथा का वाचन करते हुए कहा कि कथा को केवल सुनने से ही भला नहीं होने वाला, इसको जीवन में उतारने से संसारिक मार्ग में आने वाली कठिनाइयां दूर हो जाती हैं और मनुष्य भव सागर से पार हो जाता है। उन्होंने दान की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर जब राजा बलि के यहां आए तो उन्होंने ब्राह्मण बालक पर सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।श्रीराम जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि आज हमको राम बनने की आवश्यकता है। क्योंकि गली-गली में रावण पैदा हो गए है।
श्रीकृष्ण जन्म की कथा का श्रवण करवाते हुए उन्होंने कहा कि कंस के अत्याचार से तीनों लोक त्राहि-त्राहि कर उठे तो भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। कंस अपनी बहन देवकी की शादी वासुदेव से धूमधाम से कराने के बाद जब उन्हें छोड़ने जा रहा था, तभी भविष्यवाणी सुनकर उसकी सारी खुशी काफूर हो गई। उसने वासुदेव के अनुनय-विनय के बाद दोनों को कारागार में डाल दिया और एक-एक कर उनके छह बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। जब भगवान कृष्ण ने आधी रात को अवतार लिया तो सारे पहरेदार गहरी निद्रा में सोए हुए थे और हथकड़ियां व कारागार के ताले अपने आप खुल गए। वासुदेव कृष्ण को टोकरी में रखकर गोकुल में छोड़ आए और वहां से माया रूपी बालिका को अपने साथ ले आए। इधर जब कंस बच्चे के रोने की आवाज सुना तो कारागार की तरफ दौड़ पड़ा। उनके हाथों से छीनकर जैसे ही उसने माया को जमीन पर पटकने का प्रयास किया तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में चली गई और कहा कि तुझे मारने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है। कथा के दौरान कृष्ण जन्म की झांकी देख श्रोता आनंद में झूम उठे। मौके पर पर पर प्रमुख रूप से सुभाष राय,बल्लू राय, ममता राय, संदीप मिश्रा ,मंजू मिश्रा,प्रभा जायसवाल,पुष्पा राय, सतीश साहू हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।
कथा को केवल सुनने से ही भला नहीं होने वाला, इसको जीवन में उतारने से संसारिक मार्ग में आने वाली कठिनाइयां दूर हो जाती हैं-शीघ्रता त्रिपाठी
