हमारा एक ही लक्ष्य आनंद की प्राप्ति—श्रीश्वरी देवी

उतई–।नगर के दशहरा मैदान में कृपालु दरबार समिति द्वारा आयोजित दिव्य दार्शनिक रसमय सकिर्तन के दूसरे दिवस कृपालु महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीश्वरी देवी ने कहा की जीव का लक्ष्य क्या है इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की विश्व का प्रत्येक जीव आनंद की प्राप्ति हेतु ही प्रतिक्षण प्रयत्नशील है और कोई भी जीव एक छन के लिए भी अकर्मा नही रह सकता आनंद की प्राप्ति ही हमारा लक्ष्य है अतएव दिनभर जितने विपरीत कार्य हम करते है केवल आनंद के लिए ही करते है। हम आनंद ही क्यों चाहते है? इसके उत्तर में उन्होंने कहा की चुकी विश्व का प्रत्येक जीव भगवान का अंश है,भगवान अंशी है साथ ही साथ प्रत्येक अंश अपने अंशी से ही स्वाभाविक रूपेण प्यार करता है। अतः विश्व का प्रत्येक जीव भी अपने अंशी भगवान से ही स्वाभाविक रूप से प्यार करता है और भगवान स्वयं आनंद है।भगवान एवं आनंद पर्यायवाची शब्द है अतः विश्व का प्रत्येक जीव आनंद से ही प्यार करता है।आनंद की परिभाषा क्या है? वेद कहता है आनंद सदा अनंत मात्र का होता है, अनंत काल के लिए मिला है ।आनंद चुकी भगवान का पर्यायवाची शब्द है अत एव ऐसा आनंद एक बार ही मिल जाए किसी को फिर छिना नही करता अपितु वो निरंतर बढ़ता ही रहता है लेकिन ऐसा आनंद हमे आज तक प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि जो संसारी वस्तुओ से हमे जिस आनंद की प्राप्ति होती है वो तो क्षण भंगुर होती है।कुछ क्षण पश्चात वही आनंद दुख मे परिवर्तित हो जाता है अतः यह आनंद नही है जो हमे संसार से मिलता है।आनंद स्वयं भगवान है अतः भगवत प्राप्ति पर ही हम सदा सदा के लिए आनंदमय हो सकते है।

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