राशन कटौती के विरोध में जिले के सभी विक्रेता अपनी मांगों को लेकर शासन को सौंपे ज्ञापन व अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

  • रोशन अवस्थी@देवभोग। नवंबर महीने में खाद्यान्न भंडार में कटौती के चलते पूरे छत्तीसगढ़ के राशन विक्रेता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसमें गरियाबंद जिले के सभी राशन विक्रेता अपनी मांग को लेकर काम बंद, कलम बंद का आह्वान कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इनका प्रमुख मांगे यह है कि, जब तक शासकीय उचित मूल्य दुकान में प्राथमिकता के अनुसार पूर्ण रूप से भंडारण नहीं किया जाएगा तब तक जिले के सभी पीडीएस दुकान बंद रहेगी। सरकार ने वन नेशन वन कार्ड के अनुसार सभी दुकानों को जोड़ने जा रही है। जिसके अंतर्गत नवंबर 2022 में सभी पीडीएस दुकानों को उनके स्टाक पंजी के अनुरूप चावल, शक्कर व नमक नियमित भंडारण के हिसाब से कम मिला हुआ है। जिसके चलते आवंटन सभी दुकानों में कम मिला है। जिसके फलस्वरुप राशन विक्रेताओं को राशन बांटने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।बता दे सरकार ने राशन वितरण ऑनलाइन की प्रक्रिया दिसंबर 2016 में प्रारंभ की थी ।तभी से सभी दुकानों में टेबलेट के माध्यम से ऑनलाइन वितरण की प्रक्रिया चालू हुआ था। दूरस्थ क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र में सरवर की समस्या होने के चलते बहुत सारे राशन कार्ड अपलोड नहीं हो पाते थे। जिसके कारण ऑनलाइन स्टॉक में भी शेष रह जाता था ।और माह के अंत तक भी सरवर की समस्या के कारण सही ढंग से अपलोड नहीं हो पाता था। और अभी वर्तमान में पुराने स्टाक पंजी के अनुरुप राशन का भंडारण नवंबर माह में किया गया है।

अब सवाल यह उठता है कि जब विक्रेताओं के द्वारा हर माह घोषणा पत्र भरकर जमा किया जाता था ।तो खाद्य निरीक्षक के द्वारा अगले माह में शत-प्रतिशत डियो काट कर राशन क्यों भंडारण किया जाता था ।जबकि नियम यह कहता है कि घोषणा पत्र के हिसाब से अगले माह का भंडारण तय होता हैं। तो खाद्य निरीक्षक के द्वारा हर माह घोषणा पत्र के अनुरूप राशन अगले महा क्यों भंडारण नहीं किया गया। यह सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हो रहा है। देखा जाए तो इसकी इसमें गलती खाद्य विभाग का है जो इस तरह के भंडारण हर माह किया करता था। क्योंकि घोषणापत्र के हिसाब से ही अगले माह का डिओ जारी होता है। अगर घोषणापत्र में वितरण शेष दिखा रहा है तो अगले महा डियो में कटकर चावल शक्कर व नमक का भंडारण होना होता है।

खाद्य विभाग के द्वारा 8 साल के बचे शेष चावल ,शक्कर और नमक को एक साथ काटकर विक्रेताओं के ऊपर अतिरिक्त बोझ पैदा कर रही है। क्यों कि गोदामों में पर्याप्त साधन नहीं होने के चलते बजे स्टाक कहीं सड़ गया तो कहीं पूरी तरह खराब हो चुका है। ऐसे में राशन विक्रेताओं के द्वारा उस सड़े गले चावल को राशन कार्ड धारियों को कैसे बांटे । बहुत सारे दुकानों में यह शेष बचे चावल सड़ गल कर खराब हो चुका है। और बांटने योग्य नहीं रहा। न हीं उस चावल को कार्ड धारी ले सकता है। ऐसे में विक्रेताओं के द्वारा कैसे चावल का वितरण कर सकेंगे यह सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। क्योंकि आठ साल के चावल ,शक्कर व नमक को समुचित रूप से रखा नहीं जा सकता ।कई सारे दुकानों में यह जो बचे चावल दीमक लगा है तो कहीं सड़ चुका है।

राशन दुकान संचालकों ने अपनी प्रमुख 10 सूत्रीय मांग के साथ उनका प्रमुख मांग ऑनलाइन प्रद्शित स्टाक पंजी को करें शून्य …..
राशन दुकान विक्रेताओं का अपने 10 सूत्रीय मांगों से उनका प्रमुख मांग यह है कि ऑनलाइन स्टॉक पंजी को किया जाए शून्य। उन्होंने प्रमुख रूप से यह उल्लेख किया है कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा सभी पीडीएस दुकानों के शेष बचे स्टॉक को शून्य कर इस माह नवंबर में पूरा-पूरा राशन का भंडारण किया गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार भी हमारी पुरानी स्टाक पंजी को करे शून्य और नवंबर माह का भण्डारण को पूरा पूरा किया जाए ।और पीडीएस संचालकों के वेतन में भी बढ़ोतरी किया जाए।

वर्षण:-

सभी राशन दुकानों के विक्रेता नियमित रूप से दुकान खोलें और उनकी स्टाक की कमी हुई थी उनकी जांच हो चुका है ।और अतिरिक्त आवंटन की मांग की गई है। जिला कलेक्टर महोदय के माध्यम से संचालक नागरिक आपूर्ति विभाग रायपुर को पत्र भेजा जा चुका है ।और दो-तीन दिन के अंदर शेष बचे आवंटन जारी हो जाएगा।

सुधीर गुरु खाद्य अधिकार जिला गरियाबंद ।

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