- आदिवासी लोक मादरी नृत्य देखने उमड़े लोग
पाटन। छत्तीसगढ़ी परंपरा में दीपावली की रात गौरी-गौरा की प्रतिमा स्थापित करके पूरी रात पूजा की जाती है। दूसरे दिन भक्तिभाव से जसगीत गाते हुए विसर्जन यात्रा निकाली जाती है। इस साल दीपावली के दूसरे दिन सूर्य ग्रहण था। सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद गौरा-गौरी की पूजा अर्चना करने बाद रात में शोभायात्रा निकालने के बाद सुबह विसर्जन किया गया।
पाटन क्षेत्र के ग्राम अचानकपुर में गौरी-गौरा पर्व श्रद्धा-उल्लास के साथ मनाया गया। शिव जी के बारात में विशेष रूप से जय गढिया बाबा आदिवासी लोक मादरी नृत्य सेवा समिति सराईटोला नगरी के कलाकारों द्वारा लोक नृत्य एवं मांदर के थाप पर आकर्षक नृत्य के साथ शोभायात्रा निकाली गई। पूरे गांव के लोग उत्सव मनाने जुटे थे। विधि-विधान से पूजा करने के बाद । मांदर एवं गड़वा बाजा की धुन पर नृत्य करके रातभर पूजा के बाद सुबह प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया । यह पर्व भगवान शंकर और पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। अंचल में पहली बार हुए आयोजन को देखने आसपास के विभिन्न ग्रामों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे थे।

