छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलो को ओलंपिक के नाम देना मुख्यमंत्री की बाहरी मानसिकता को दर्शाता है-हर्षा चन्द्राकर

      भाजपा नेत्री एव सदस्य जिला पंचायत दुर्ग श्रीमती हर्षा लोकमनी चन्द्राकर ने एक विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाई है कि छत्तीसगढ़ में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पद पर राज्य के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल बने तब से लेकर अब तक ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने राज्य की जनता के सामने कोई रूपरेखा नही बनाई गई। राष्ट्रमंडल खेलों में कड़ी मेहनत कर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए न कोई पुरस्कार है ना नौकरी की व्यवस्था है जबकि अन्य प्रदेशों की सरकार करोड़ो रूपये पुरस्कार के साथ नौकरी की भी ब्यवस्था देती है। 
        उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इतनी संवेदनहीन हो गई है कि खेलो पर भी राजनीति शुरू कर दी है, हर वार्डो और पंचायत में राजीव गांधी युवा क्लब बनाया गया है जिसमे अघोषित रूप से कांग्रेस के कार्यकर्ता ही है। जिन्हें लाखो रुपये का फंड दिया जा रहा है ताकि आगामी चुनाव में कांग्रेस के लिए कार्य कर सके। आज इन्ही के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विभिन्न पारंपरिक खेलो को कराया जा रहा है। जिसे छत्तीसगढ़ ओलंपिक के नाम दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में जब भाजपा की सरकार थी तब हर साल राजिम कुंभ का आयोजन किया जाता था लेकिन जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी तब कुंभ को बाहरी नाम है बताकर राजिम कुंभ की जगह राजिम पुन्नी मेला रख दिया गया था तो क्या छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल को ओलंपिक नाम देना उचित होगा। इस ओलपिंक के खिलाडियों का भविष्य केवल राज्य तक ही है, गिल्ली डंडा, भौरा,बाटी से प्रदेश के बच्चों का भविष्य सँवरने वाला नही है, सरकार को चाहिए कि इसमें जो पैसा और समय का दुरुपयोग किया जा रहा है उसके बजाय हमारे प्रदेश के होनहार खिलाड़ियों को खेल सामग्री, अच्छे ग्राउंड, अच्छे कोच, सहित अन्य जरूरी सुविधा उपलब्ध कराए ताकि हमारे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी राज्य के बाहर राष्ट्रीय एव अंतरराष्ट्रीय खेलो में हिस्सा लेकर मेडल जीतने में कामयाब हो और  छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम रौशन करे।

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