छुरा ….गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायत देवरी के आश्रित ग्राम गोनबोरा मे निवासरत विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के लोगों की स्थिति आज भी खराब। कमार भुजिया जनजाति की छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र के गरियाबंद जिले में बसे आज भी आदिमानव की तरह जीवन जीने विवश है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आज तक मूलभूत सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है जबकि केंद्र सरकार के द्वारा करोड़ों रुपया का कमार भूंजिया अभिकरण को उनके कल्याण के लिए दिया जा रहा है।शासन प्रशासन जमीनी हकीकत पर नजर डाले जमीनी स्तर पर काम करने की कोशिश करें ताकि हकीकत जिन परिवारों को मदद मिलना चाहिए मिल सके।सरकार इन विशेष पिछड़ी जनजातियों को छूट तो दिया है कि अपने वंशज बढ़ाएं लेकिन उनकी बच्चों की हालत काफी खराब पहने के लिए कपड़े भी नसीब नहीं।।
लेकिन शासन कहती कुछ और हकीकत कुछ और नजर आता है।जोधन कमार ने बताया कि हमारे 9 बच्चे हैं बेटी बेटा शासन-प्रशासन हमें ऐसे ही बेहाल छोड़ दिए हैं हमारी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं जो शासन प्रशासन से सहयोग मिलना चाहिए नहीं मिल पा रहा है जिसके चलते आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है रहने को पक्का घर भी नसीब नहीं। हमारी परिवारों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रहा है ऐसा लगता है कि हम कमार जनजातियों का जीवन अंधेरा ही लिखा है। समाजसेवी मनोज पटेल संस्था के अध्यक्ष ने कहा हालात चाहे जो भी हो शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए एक रोटी कम खा कर भी बच्चों को शिक्षा जरूर देना विशेष पिछड़ी कमार भुंजिया जनजातियो के जीवन में खुशियां लाने के लिए अपना तन मन से सहयोग करने में पीछे नहीं हटेंगे आप सभी के सहयोग करना मेरा जीवन का उद्देश्य बन गया है। आदिवासी समाजसेवी रेखराम ध्रुव भी उपस्थित रहे।

