जिले में भेंट मुलाकात कार्यक्रम के तहत प्रदेश के मुख्यमंत्री बालोद जिला में तीन दिवसीय प्रवास पर रहे इस दौरान उन्होने कई घोषणाएं की है इस पर पूर्व विधायक विरेन्द्र साहू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आ रहा है ऐसे में मुख्यमंत्री का पुरे साढ़े तीन वर्ष तक विकास के कार्यों में ध्यान नहीं रहा और अब फिर से प्रदेश की जनता को चुनावी घोषणा कर लुभाने का प्रयास कर रहे हैं पर जनता समझ चुकी है अब उनके छलावा में आने वाली नहीं है। पिछले तीन वर्ष उन्होने केवल गांधी परिवार की सेवा की और अभी भी उनकी सेवा में अनवरत लगे हुए हैं इसीलिए राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर पुनः आसीन करने के लिए राज्य कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित करवा लिया।
लाखों बेघरों को नहीं मिल पाया आवास –
उनके द्वारा किये गए वायदे अधुरे हैं अब तो उनके मंत्री व कार्यकर्ता भी नाराज हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना की राज्य अंश उन्हाने अब तक जारी नहीं किया है जिसके चलते लाखों बेघरों को अवास नहीं मिल पाया है, जिले के दौरे में आए सीएम ने तो बेघर घुमंतु परिवारों की सुध तक नहीं ली।
किसानों के साथ किया छल-
तीन वर्ष बाद उन्होने विपक्ष के दबाव में 1 नवंबर से धान खरीदी करने की घोषणा की जबकी भाजपा शासन काल में प्रतिवर्ष व्यवस्थित रूप से धान खरीदी होती रही है। विलंब से धान खरीदी शुरू करने के बाद भी अवव्यस्था का आलम रहा बारदाना की व्यवस्था भी किसानों को करनी पड़ी और किस्तों में उनके हक का पैसा डाल रहे हैं। इस सरकार ने सबसे ज्यादती किसानों के साथ की है।
संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से हुआ छल-
उन्होने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमितीकरण का वादा किया था पर अब उनकी छंटनी हो रही है इस सदमें से रायपुर का एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली उन्होने 5 लाख रोजगार की बात कही थी, बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही थी उनकी कथनी और करनी में अंतर है।नियमित कर्मचारियों को भी अपने हक के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
शराबबंदी के अपने वादे से मुकर रही सरकार- गुरुवार को भूपेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और शराब बंदी समीक्षा समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ही कह रहे हैं कि ये मुद्दा आम नागरिकों का नहीं है। जबकि महिलाओं ने कई बार शराब बंदी के लिए आंदोलन किया है। पल्ला झाड़ कर उन्होंने महिलाओं का अपमान किया है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
सवाल पूछने पर किया अपमानित- पूर्व विधायक ने कहा कि भेंट मुलाकात के दौरान किसानों ने अपनी समस्याओं को रखा पर उन्होंने किसानों को फटकारते हुए कहा कि वे राजनीतिक बात न करें जब उन्हें लगा कि उनका पोल खुल रहा है तो कुछ चुनिंदा लोगों को खड़ा कराकर अपनी वाहवाही कराई।
रोका छेका के नाम से उन्होंने योजना बनाई जिसमें मवेशियों को गौठानों में दाना पानी की व्यवस्था करने की बात कही थी पर राजधानी से लेकर गांवों तक सड़कों पर मवेशियों का डेरा बना रहता है जिससे गोवंश की हादसों से मौत हो रही है और आम नागरिक भी दुर्घटना की चपेट में आ रहे हैं।
चुनाव नजदीक आया तो फिर ठगने आ गए भुपेश बघेल- विरेन्द्र साहू
