रोशन सिंह@उतई।यह कहानी है परियोजना दुर्ग ग्रामीण के नगर पंचायत उतई के मई 2018 में 7 माह में पैदा हुए गंभीर कुपोषित बच्चे नितेश की। समय से पूर्व जन्म लेने के कारण उसका वजन सिर्फ 1.2 किलो था।बहुत ही कम वजन और कमजोर होने के कारण पिता चुरावन और माता डिलेश्वरी को समझ नहीं आ रहा था कि इतने कमजोर बच्चे की देखभाल कैसे किया जाए ।अजय कुमार साहू बाल विकास परियोजना अधिकारी दुर्ग ग्रामीण ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र उतई 07 की कार्यकर्ता सरिता साहू, सहायिका रूखमणी ठाकुर एवम् मितानिन के द्वारा लगातार इनके घर में गृह भेंट किया गया और कंगारू मदर केयर के बारे में माता,पिता और परिवार के सभी लोगों को जानकारी दी गई। अब यहां पर एक दिक्कत और आई कि बहुत कोशिश के बाद भी मां का दूध नहीं आ पाया। मां का दूध नहीं आने के कारण बच्चे को ऊपर का दूध पिलाया गया ऊपरी दूध पिलाते समय की जाने वाली सावधानी बॉटल की सफाई, स्वच्छता आदि के बारे में कार्यकर्ता के द्वारा बताया गया। लगातार निगरानी से बच्चे के वजन में थोड़ा सुधार दिखने लगा। जब बच्चा 6 माह का हुआ तो ऊपरी आहार की शुरुआत की गई। अक्टूबर 2019 में इसे सुपोषण अभियान में शामिल किया गया और बाल संदर्भ शिविर में लाभान्वित किया गया। धीरे-धीरे बच्चे का वजन सुधरने लगा परंतु इस समय वह गंभीर से मध्यम कुपोषित की श्रेणी में ही आ पाया। हर बार सुपोषण अभियान में इस बच्चे का नाम आता रहा। मां के बाहर काम पर जाने के कारण इस बार दादी को बच्चे के देखरेख के बारे में समझाया गया ।दादी के देखरेख में बच्चे को घर में दिन में कम से कम 4 बार खाना खिलाना, सुबह-सुबह जायफल का प्रयोग एवं आंगनवाड़ी केंद्र में गर्म भोजन और मोरेंगा बार कार्यकर्ता के द्वारा केंद्र में दिया जाने लगा।
पर्यवेक्षक प्रमिला वर्मा ने बताया कि कार्यकर्ता सहायिका के विशेष निगरानी एवं दादी की देखभाल से अभी बच्चे का वजन 14 किलोग्राम है और 4 साल का यह बच्चा अब एकदम स्वस्थ है सामान्य पोषण स्तर में आ चुका है।
गंभीर कुपोषण से मुक्त हुआ नितेश
