छुरा*समाज सेवी मनोज पटेल ने शासन प्रशासन से मांग की है कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना बहनों के लिए सम्मान स्वाभिमान सशक्तिकरण की योजना है। गैस के उपयोग से स्वास्थ्य की रक्षा, पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में विशेष योगदान है। साथ ही महिलाओं को घर परिवार बच्चों के लिए पर्याप्त समय दे रही हैं।लेकिन आज घरेलू रसोई गैस सिलेंडर मिट्टी तेल आसमान को छु रहे हैं जिससे माताओं एवं बहनों को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर का उपयोग करना छोड़ना पड रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि अग्नि के बिना खाना नही पका सकते खाना को कच्चा तो खा नहीं सकते हैं इसलिए माताएं खाना पकाने के लिए जंगलों से पेडों का कटाई कर लाने पर मजबूर हो रहे।शासन ने माताओं एवं बहनों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए उज्जवला योजना चला तो रहे हैं पर उज्जवला गैस सिलेंडर का दाम कम नहीं हो रहा और बड़ते जा रहा हैं। जिससे गृहणीओं की रसोई बजट गडबडा रही हैं। घर खर्च को एक समान नहीं रख पाने के कारण जंगलों का कटाई कर लकडी लाने में मजबूर हो गई हैं।जिससे हमारे आने वाले भविष्य खतरे में नजर आ रहें है। यदि हम पेड़-वृक्षारोपण की सहायता से पृथ्वी हरी-भरी रहती है तो मनुष्य के पास कई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ हैं। ईंधन और लकड़ी से फल-फूलों, दवाइयों, एयर कंडीशनिंग, वर्षा का संतुलन, जैविक उर्वरक, मिट्टी के क्षरण की रोकथाम, बाढ़, फसलों की रक्षा के लिए कीड़े खाने वाले पक्षियों को आश्रय प्रदान करने जैसे अनगिनत लाभ हैं। लेकिन जगंलों की कटाई होते रहने से भविष्य इन सभी फल फूल का लाभ नहीं ले पायेंगे।
