- उतई महाविद्यालय में ’कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न एवं निवारण’ विषय पर परिचर्चा आयोजित
रोशन सिंह@ उतई ।“लड़कियाँ किसी से कमजोर नहीं हैं। उसने हर क्षेत्र में अपने आपको प्रमाणित किया है। अगर वह आत्मविश्वास से आगे बढ़ेगी तो किसी को उसे छेड़ने की हिम्मत नहीं होगी। हमें छुई-मुई, कमजोर और अबला बनने से बचना होगा। आपकी अस्मिता पर कोई हाथ डालता हो तो आपको सेल्फ डिफेंस की हर तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने पर आजकल सख्त कानूनी सजा का प्रावधान है”। उक्त विचार उतई थाना प्रभारी एवं लम्बे समय से महिला सुरक्षा से जुड़ी मोनिका नवी पाण्डेय ने शासकीय दानवीर तुलाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय उतई में ’कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न एवं निवारण के उपाय’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किया। परिचर्चा का आयोजन महिला उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ ने किया था। इस परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश पांडे ने कहा कि “राजस्थान के भँवरी देवी प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय ने अपने द्वारा दिये गये दिशा निर्देश में कार्य स्थल को विस्तार से व्याख्यायित किया और महिलाओं के कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के विरूद्ध सरकार को कानून बनाने की सलाह दी। हमारा संविधान स्त्री-पुरूष को बराबरी का अधिकार देता है। अगर संस्था के किसी भी महिला अधिकारी, कर्मचारी या छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार होता है तो शर्म, डर, भय को छोड़कर प्रारंभिक स्तर पर ही वे उसका विरोध करें और महिला उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करायें”। महिला उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. मधुलिका रॉय ने कहा कि “इस संस्था में छात्राएँ और महिला स्टाफ पूरी तरह स्वत्रंत, भयमुक्त और सुरक्षित हैं। यह कार्यक्रम छात्राओं में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। इस तरह के आयोजन वर्ष भर जारी रहेंगे“। इस अवसर पर डॉ. सियाराम शर्मा ने कहा कि “महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए पुरूष प्रभुत्व की मानसिकता को बदलनी होगी, जिसकी जड़ें हमारी परम्परा, इतिहास और संस्कृति में गहरे स्तर तक जमी है। परिचर्चा का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन एन.सी.सी. अधिकारी लेफ्टिनेंट अनुसूईया जोगी ने किया। इस अवसर पर एन.सी.सी. की छात्राएँ, महिला कर्मचारी एवं अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।
