मंदिर हसौद से सिवनी(मप्र) पैदल जाने निकले थे मजदूर, लेकिन सेलूद के ढौर चौक के पास पहुंचने पर ग्रामीण ने पुलिस में कर दी ख़बर

पाटन. बेहतर जिंदगी की आस लिए अपने गांव-घरों से निकले प्रवासी मजदूर मीलों दूर देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे-बड़े रोजगार धंधों में लगे हुए थे। लेकिन कोरोना महामारी फैलने के कारण अब वे लॉकडाउन में जहां-तहां फंस गए हैं। पहले तीन हफ्ते के लॉकडान की अवधि को किसी तरह निकालने के बाद वह हर हाल में अपने-अपने घर लौटना चाहते थे। लेकिन दुबारा 19 दिनोंके लॉकडाउन 2 ने उनकी बेचैनी बढ़ा दी। इस बीच उनका रोजगार तो बंद हो ही गया, जो थोड़े पैसे बचे थे वह भी खत्म हो गए हैं।
रायपुर के मंदिर हसौद में रोजी रोटी के लिये मध्य्प्रदेश के सिवनी जिला के ग्राम परासरई तहसील लखना से 11 मजदूर अपने जीवकोपार्जन के लिये आये हुये थे। लॉक डाउन में किसी तरह से 24 दिनों तक गुजर बसर किये। जब उनके पास रखे रुपये पैसे खत्म हो गया तब खाने पीने की समस्या आने पर सभी लोगो ने वापस अपने गांव जाने की ठान ली और अपना सामान पैक कर बालाघाट के लिये निकल गए। शनिवार को सुबह सभी अपने घर के लिये निकले सोमवार शाम करीब 6 बजे दुर्ग पाटन मुख्य मार्ग में ढौर चौक के पास बोरिंग में पानी पीने के लिये रुके थे। जिसकी सूचना ग्रामीण के द्वारा सेलूद के कोटवार को दी गई। कोटवार द्वारा उतई थाना में जानकारी दिए जाने पर मौके पर उतई पुलिस पहुंची। थाना प्रभारी अवधराम साहू ने बतलाया कि सभी लोगो की जानकारी लेने के बाद उन्हें उतई के सांस्कृतिक मंच में ठहराया ले जाकर गया है। जहां पर उनके रहने और खाने पीने के व्यववस्था की गई है। सभी लोग मेशन और राजमिस्त्री का काम करते है। वे सभी एक ही जगह रहकर मंदिर हसौद में काम करते थे।
गौरतलब हो कि यह यह दो-चार नहीं अनगिनत मजदूरों की अंतहीन दास्तान है, जो काम धंधे की तलाश में देश के अनेक राज्यों से देश के अन्य शहरों में पहुंचे थे, लेकिन लॉकडाउन में फंसे हुए हैं।

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