पत्रकार युद्ध भूमि में समाचार संकलन कर सकते हैं लेकिन कांकेर के लाकडाउन में नहीं?


प्रांजल झा ….

★ सभी पत्रकार भाइयों कलेक्टर व एसपी को सौंपा ज्ञापन और जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की..!!
★ कांकेर में एक बार फिर पत्रकार बनाम थानेदार जंग जारी…?
★ पत्रकार ही नहीं पत्रकारिता को भी गाली दी थानेदार ने…?
कांकेर. कांकेर में इस समय फिर उसी तानाशाह थानेदार की दादागिरी चल रही है जो पहले भी इसी शहर का थानेदार रहकर पर्याप्त बदनाम हो चुका है तथा पड़ोसी थाने में रहकर येन केन प्रकारेण जुगाड़ जमा कर फिर से अपनी पोस्टिंग कांकेर में करवाने में सफल हो चुका है ।प्रशासन ने बिना इनके पिछले रिकॉर्ड का ध्यान किए एक बार फिर इन्हें जिला मुख्यालय की कांकेर कोतवाली का प्रभारी बना दिया अब यह महोदय सबसे पहले तो कुछ दिन लॉक डाउन पीरियड में लड़कों बच्चों तथा गांव वालों को डंडा लेकर दौड़ाते रहे अब उनकी हिम्मत इतनी हो गई है कि पत्रकारों को भी न केवल डराने, धमकाने लगे हैं बल्कि पत्रकार और पत्रकारिता दोनों को बुरी से बुरी गालियां देने की हिम्मत करने लगे हैं, इसकी रिपोर्ट संबंधित पत्रकार प्रांजल झा तथा गणेश तिवारी उप संपादक दैनिक श्रम बिंदु द्वारा प्रदेश के समस्त बड़े अधिकारियों सहित कांकेर के कलेक्टर एवं एसपी से भी कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक श्री अहिरे ने पत्रकारों को आश्वासन देते हुए कहा है कि मैंने थानेदार को उचित समझाइश दे दी है ,फिर भी लाक डाउन समाप्त होने के बाद इस विषय पर कुछ ना कुछ कड़े कदम अवश्य उठाऊंगा । पत्रकार गणेश तिवारी ने अपने प्रार्थना पत्र में निवेदन किया है कि वे एक अन्य पत्रकार प्रांजल झा के साथ समाचार संकलन हेतु दिनांक 19 अप्रैल को 1:30 बजे के लगभग शासकीय महाविद्यालय के पास गए हुए थे कि अचानक पुलिस की गश्ती गाड़ी आई जिसमें से उतर कर थानेदार नरेश दीवान ने हम दोनों पर डंडा लहराया और गालियां बकने लगे। जब हमने बताया कि हम पत्रकार हैं और अपना काम कर रहे हैं, पत्रकारों को तो आप लोगों की तरफ से भी छूट रहती है तो थानेदार साहब और भी गरम हो गए और पत्रकार लोगों तथा पत्रकारिता दोनों को बुरी से बुरी मां बहन की गालियां बकने लगे। जब हमने उनसे कहा कि आप ठीक से बात कीजिए पद की गरिमा को देखिए, तो वे जेल भेजने की धमकी देने लगे उनसे पूछा गया कि जेल किस खुशी में भेजेंगे? तो थानेदार ने अकडते हुए कहा कि हम किसी भी सच्चे झूठे आरोप में जेल भेजेंगे । उनके इस व्यवहार तथा बार-बार डंडा दिखाने, गाली बकने से हम दोनों पत्रकार बहुत भयभीत हो गए और हमें लग रहा है कि यह हमें कांकेर में रहकर काम करने नहीं देंगे । इनकी दादागिरी के खिलाफ हम ना चाहते हुए भी यह प्रार्थना पत्र देने को बाध्य हुए हैं ,यदि कार्यवाही इस पर भी नहीं होगी ,तो हम इस मामले को पत्रकारिता की गरिमा के अनुसार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हेतु और भी आगे ले जाने पर विवश होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन पर होगी। उल्लेखनीय है कि थानेदार नरेश दीवान पूर्व में भी पत्रकारों से उलझने तथा उनको डराने, धमकाने के लिए बदनाम रह चुके हैं। उनकी ऐसी गिरी हुई हरकतों के कारण छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार बदनाम हो सकती है, क्योंकि मुख्यमंत्री भी जानते हैं की पत्रकार लड़ाई के मैदान पर भी समाचार संकलन करने के लिए जा सकते हैं ।,,,,लेकिन क्या कारण है कि कांकेर में लाकडाउन के दौरान भी पत्रकारों को डंडा दिखाया जाता है….? जिसे लेकर आज पत्रकारों ने टी आई नरेश दीवान को कोतवाली से हटाये जाने की मांग को लेकर कलेक्टर केएल चौहान एवं पुलिस अधीक्षक एमआर अहिरे को ज्ञापन सौंपा
ज्ञापन सौपने के दौरान गणेश तिवारी, प्रांजल झा,तनुज ठाकुर, अक्कू रिजवी खान ,पंकज सिंह, वीरेंद्र यादव,नरेंद्र कश्यप भूपेंद्र शांडिल्य व अन्य पत्रकार साथी गढ़ उपस्थित रहे।

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