प्रांजल झा…
● बरसात आने पर खोदे गए गड्ढे का गलत परिणाम आ सकता है..
कांकेर. भारत सरकार ने गांवों के लोगों के लिए , उनकी गरीबी दूर करने के लिए महात्मा गाँधी जी के नाम पर मनरेगा योजना बहुत पहले से शुरू की हुई है , किन्तु दुख का विषय है कि यह योजना भी अन्य सरकारी योजनाओं की तरह खाऊपन की शिकार बन चुकी है , इसका एक ज्वलंत उदाहरण यह है कि कांकेर जिला मुख्यालय के निकट ग्राम गोविंदपुर में इस योजना के तहत ग्रामवासी मजदूरों से इतने बड़े-बड़े गड्ढे अनावश्यक रूप से खुदवाए गए हैं , जिनसे गांव वालों और खासकर बच्चों के जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया है । संलग्न चित्र से स्पष्ट है कि यह गली अथवा रास्ता , जो भी हो , एक बरसात आते ही पहाड़ी नाले में बदल जाएगा , जिसमें बच्चे तो बच्चे , बड़े भी बह सकते हैं । इसी तरह अन्य स्थानों में सड़क के दोनों और भी जानलेवा गड्ढे खोदकर रख दिए गए हैं , मात्र काम बढ़ाने और योजना का पैसा मिल बांट कर खाने के चक्कर में सरकारी कर्मचारियों द्वारा कुछ भी भ्रष्टाचार किया जा रहा है । इस पर न ग्राम पंचायत न जनपद पंचायत न जिला पंचायत किसी का कोई कंट्रोल नहीं है । यदि कलेक्टर आकर स्वयं योजना स्थल का निरीक्षण करें तो पोल खुल सकती है अन्यथा बरसात आने पर इन ऊटपटांग कामों का कुछ भी गलत परिणाम निकल कर सामने आ सकता है जो कि जानलेवा भी हो सकता है । जिला प्रशासन को चाहिए कि यथाशीघ्र इस घातक कार्यक्रम का सूक्ष्म निरीक्षण करें और मनरेगा जैसी उपयोगी योजना को बदनाम होने से बचाएं । अन्यथा इस योजना में बहुत बड़ा बंदर बंटवारा होने ही वाला है ।
