तहसील कार्यालय छुरा मे पैसे व पहुंच वालो का बोलबालागरीब किसानो का कोई सुनवाई नही,जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध,जमीन हड़पने दलालों की बड़ी जालसाजी

.एकतरफा सीमांकन की कार्यवाही करते हुए कृषक को उसकी पैतृक भूमि से किया बेदखल, 12 साल से तहसील के चक्कर लगा रहे पीड़ित अब सीएम से करेंगे शिकायत

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। एक बार फिर तहसील कार्यालय अपने कारनामो की वजह से विवादों मे है ।मामला बीते 10 वर्षो से ग्राम रजनकटा के कृषक खेमलाल यादव को बंदोबस्त की त्रुटि का खामियाजा विगत 10 वर्षों से भुगतना पड़ रहा है। इन्हें तहसील कार्यालय के साथ-साथ कभी अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय छुरा, तो कभी जिलाधीश कार्यालय गरियाबंद का चक्कर लगाना पड़ रहा है। किंतु कहीं से कोई कार्यवाही होते दिखाई नहीं दे रही है। इसके विपरीत कृषक को उसकी भूमि से बेदखल करने का प्रयास राजस्व विभाग के स्थानीय कर्मचारी एवं अधिकारीयो के द्वारा किया जा रहा है।
कृषक के पास अपनी भूमि होने के सारे प्रमाण है तथा तहसील कार्यालय द्वारा उनके पक्ष में त्रुटि सुधार करने हेतु 1 वर्ष 4 माह पूर्व पटवारी हल्का नम्बर 17 को आदेशित किया जा चुका है। लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के बजाय तहसीलदार द्वारा उक्त भूमि का सीमांकन के लिए आदेश जारी करना अनेक संदेहों को जन्म देती है। तहसीलदार को त्रुटि सुधार करने का आवेदन 10 वर्ष पूर्व का है। जबकि सीमांकन कराने का आवेदन 15-20 दिवस पूर्व का है चूंकि बंदोबस्त में भूमि से कृषक का नाम छूट गया है जो पूर्व रिकॉर्ड में है, तथा कब्जा भी है। सीमांकन वर्तमान अभिलेख के द्वारा किया जाता है।
गत दिवस 19 मई 2022 को तहसीलदार के आदेश पर राजस्व पटवारी हल्का नंबर 17 ईमरान खान एवं राजस्व निरीक्षक गेवेन्द्र साहू द्वारा सीमांकन किया गया तथा एकतरफा कार्यवाही करते हुए रिकॉर्ड में कृषक का नाम न होने एवं सीमांकन हेतु आवेदन कर्ता कृषक की भूमि बताकर भुक्तभोगी कृषक खेमलाल यादव को उनकी पैतृक कृषि भूमि जिस पर वह 40-50 वर्षों से कृषि कर रहा है, से उन्हें बेदखल करने का कुत्सित प्रयास किया गया।
बंदोबस्त त्रुटि सुधार हेतु आवेदन प्रस्तुत है तो नियमानुसार त्रुटि सुधार के पश्चात ही सीमांकन होना चाहिए किंतु तहसील कार्यालय छुरा के तहसीलदार का अपना अलग ही फरमान चलता है। इससे लगता है कि राजस्व विभाग के कर्मचारी अधिकारी भी एनकेन प्रकारेण खेमलाल को उनकी भूमि से बेदखल कर उक्त भूमि को दलाल के हाथों में देना चाहते हैं। सीमांकन के समय ग्राम के करीब 50-60 ग्रामीण तथा मीडिया वाले थे सभी ने सीमांकन को गलत बताया तथा पंचनामा में सभी ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। तब अंत में सीमांकन कराने वाले आवेदक तथा उस भूमि को क्रय करने उत्सुक तथाकथित दलाल एवं स्थानीय कोटवार का हस्ताक्षर करा कर पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा खानापूर्ति की गई। पीड़ित कृषक द्वारा तत्काल नायब तहसीलदार को आवेदन देकर सीमांकन रद्द करने और त्रुटि सुधार के पश्चात ही पून: सीमांकन करने की मांग की गई। ऐसे ही एक प्रकरण में शासन प्रशासन द्वारा कार्यवाही नही किये जाने से व्यथित होकर एक तहसील कार्यालय के समक्ष एक कृषक द्वारा आत्मदाह की कोशिश की गई है । बता दे की जमीन
दलालो के चककर मे इन दिनो पांडुका अंचल मे अवैध प्लाटिंग की कालाबजारी जोरो पर और कृषक खेमलाल की जमीन बिच मे रोड़ा आ रहा है जिस वजह से 10 वर्षो से जमीन त्रुटि सुधार नही पर पैसे वा रसुक दार लोगो का सीमांकन जैसे कार्य महज 12 दिनों मे हो जा रहा है । वही इस बारे मे कृषक खेमलाल यादव ने बताया की मैने विधायक राजिम को भी आवेदन दिया है और जब मुख्यमंत्री गरियाबंद दौरे मे आएंगे तो उन्हे भी शिकायत किया जायेगा ।क्योंकि तहसील छुरा मे अधिकारी कर्मचारी की मनमानी से आम जनता त्राहि त्राहि हो रहा है ।जहा हम जैस गरीब किसानो का कोई सुनने वाला नही है

वही इस मामले में छुरा तहसलीदार कुसुम प्रधान ने टीम गठित कर जांच करने और प्रकरण का निराकरण करने की बात कही

वर्जन

तहसीदार छुरा से सीमांकन के लिए आदेश प्राप्त हुआ था ।जिसमे आसपास के किसानो की सूचना दिया गया था और सीमांकन किया गया। अनावेदक किसान खेमलाल की जमीन जिसमे नाप मे आ रहा है । वर्तमान मे उसका कब्ज़ा है पर वर्तमान अभिलेख के अनुसार पंकज पारख का जमीन दिखा रहा है ।
राजस्व निरीक्षक पांडुका गेवेन्द् साहू

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