शादी की सालगिरह व जन्मदिन पर पौधरोपण करते हैं पर्यावरण प्रेमी यादव दंपत्ति…प्रेरित भी करते है सभी को पौध रोपण करने

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उतई (news24carate/सतीश पारख)। पर्यावरण प्रेमी यादव दंपत्ति रोमशंकर एवं कविता यादव शादी के हर सालगिरह एवं परिवार के सदस्यों के जन्मदिन पर पिछले कई सालों से पौधरोपण करते आ रहे हैं उनके द्वारा रोपित अनेक पौधे अब पेड़ का आकार ले चुके हैं उनके इस मुहिम से प्रेरित होकर जिले सहित छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह पौधरोपण कर मांगलिक अवसरों को यादगार बनाने लगे हैं।
रोमशंकर बताते हैं कि वे पिछले 25 सालों से भी अधिक समय से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं उन्होंने जल जंगल जमीन को लेकर मंडला डिंडोरी के जंगलों से अनेक किस्तों में लेख लिखे हैं इसके अलावा खारून नदी के उद्गम पेटेचुआ से लेकर संगम स्थल सोमनाथ तक खारून तट किनारे पदयात्रा कर लोगों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता लाने की मुहिम में भी योगदान दिया है पिछले 15 16 सालों से जन्मदिन गृह प्रवेश शादी एवं विभिन्न मांगलिक अवसरों पर अपने रिश्तेदारों एवं इष्ट मित्रों को उपहार स्वरूप पौधा भेंट करके भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता लाने का अभियान चला रहे हैं अनेक लोगों के आंगन में उनके द्वारा उपहार में दिए गए पौधे हरियाली बिखेर रहे हैं यादव ने पितरों एवं स्वर्गीय परिजनों की स्मृति में भी पौधरोपण के लिए अभियान शुरू किया है उनके द्वारा पितरों व स्वर्गीय परिजनों की स्मृति में रोपित अनेक पौधे पेड़ बन चुके हैं इस तरह उन्होंने जन्म से लेकर मृत्यु संस्कार तक पौधरोपण की मुहिम छेड़ करके अनेक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के कार्यों से जोड़ा है।
उन्होंने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र के द्वारा मरोदा डेम के आसपास लगभग 10 लाख पौधे रोपित किए गए थे। जो पेड़ का रूप लेने के बाद इसकी अंधाधुंध कटाई शुरू हो गई थी हर दिन हजारों की तादाद में पेड़ ठूठ में तब्दील हो रहे थे जिसे लेकर उन्होंने शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के समक्ष आवाज उठाई फिर भी इन पेड़ों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए इससे लगभग 35 प्रतिशत पेड़ ठूंठ में तब्दील हो गए तब उन्होंने लगभग 25 साल पूर्व स्वयं इन पेड़ों के संरक्षण के लिए अभियान छेड़ दिया धीरे-धीरे उनके साथ अन्य युवा भी जुड़े जिन्हें लेकर उन्होंने हितवा संगवारी नामक संस्था का गठन किया आज भी लगातार गई क्या लगाए पेड़ो की देखरेख में जुटे हुए हैं जिसके बदौलत लगभग साढ़े छः लाख पेड़ों को उन्होंने कटने से बचाया है यही नहीं उनके प्रयास से प्राकृतिक रूप से उगे लगभग 2 लाख पौधे अब पेड़ का आकार ले चुके हैं इसके अलावा उनके अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर हजारों की संख्या में पौधे रोपित किए गए हैं इनमें अनेक पेड़ का आकार ले चुके हैं।

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