कमीशनखोरी के चक्कर में मापदंडों को ताक पर रख जारी कर रहे लाइसेंस,नर्सिंग होम एक्ट के सारे नियमो के विपरित दो साल से रामामुक्ता हॉस्पिटल का हो रहा है संचालन,स्वास्थ विभाग अब इस अवैध हॉस्पिटल को लाइसेंस देने की तैयारी में….

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद।

निजी नर्सिंग होम संचालक नियमों को ताक में रखकर धड़ल्ले से अपनी दुकान चला रहे हैं। कमीशनखोरी के चक्कर में गरियाबंद जिले के जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग अधिकारी चुप्पी साध रखे हैं। शासन ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने नर्सिंग होम एक्ट लागू किया है। इस एक्ट में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों पर कार्रवाई का प्रावधान है, मगर इसके बाद भी गरियाबंद जिले में बड़ी संख्या में अवैध रूप से क्लीनिक, पैथोलेब व नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। नर्सिंग होम एक्ट अंतर्गत निर्धारित मापदण्डों को खरा उतरने वाले निजी अस्पताल संचालकों को लाइसेंस जारी किया जाता है। जिले में सैकड़ों कई ऐसे संस्थान है जो नियम विरुद्ध इसके संचालित हैं। इनमें कइयों ने प्रक्रिया भी बढाई है पर अभी तक सब यथावत है। जिले में स्वास्थ्य विभाग मरीजों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं हैं। 8 साल पहले शासन ने नर्सिंग होम एक्ट लागू किया है, जिसमें ऐसे डॉक्टर ही क्लीनिक संचालन कर सकेंगे जो शासन के गाईड लाइन का पालन करते हों। एक्ट के मापदण्डों के अनुसार जिले में मात्र एमबीबीएस डॉक्टर ही नियम व शर्तो के अनुसार क्लीनिक का संचालन कर सकते हैं। बावजूद इसके एक और दो साल का लैब टेक्निशियन का डिम्लोमा करने वाले भी पैथोलैब चला रहे हैं। वहीं कई लोग पैरामेडिकल कोर्स कर ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से क्लीनिकों का संचालन भी कर रहे हैं जबकि इसके लिए वे अधिकृत नहीं है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध रूप से संचालित अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई नहीं की जाती। इस एक्ट के तहत सैकड़ों आवदेकों ने आवेदन विभाग को प्रस्तुत किया था। इनमें गिनती के नर्सिंग होम को मान्यता दी गई है, जबकि आंकड़ों के अनुसार अभी भी कई ऐसे क्लीनिक बिना मान्यता के ही संचालित हो रहे हैं बाजूवद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है। इसके अलावा जिले में कई ऐसे क्लिनिक है जहां मरीजों के बैठने तक जगह नहीं रहता। नर्सिंग होम एक्ट के तहत अस्पताल संचालन के लिए निर्धारित जगह, मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त उपकरण सहित विभिन्न सुविधाएं दिया जाना है बावजूद इसके अधिकांश अस्पताल एक ही कमरे में चल रहे हैं।लेकिन स्वास्थ विभाग के लापरवाह और जिम्मेदार अधिकारी जान कर भी अनजान है।

आपको बता दे की गरियाबंद जिले फिंगेश्वर ब्लॉक के ग्राम बोरसी में संचालित निजी हॉस्पिटल रामामुक्ता सालो से बिना लाइसेंस के संचालित हो रहा है।उक्त निजी हॉस्पिटल द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के एक भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है।उसके बाद भी स्वास्थ विभाग ने इस पर कार्यवाही तो दूर झांकना भी उचित नहीं समझा।वही ताजुब की बात ये भी है नियमो को ताक में रखकर संचालित रामामुक्ता हॉस्पिटल को विभाग ने शासन की आयुष्मान कार्ड के योजना के तहत इलाज करने परमिशन भी दे दिया।जबकि हॉस्पिटल संचालन के लिए इसे अभी तक किसी भी प्रकार इनका पंजीयन नही हुआ है। ऐसे में इस निजी हॉस्पिटल पर स्वास्थ विभाग की मेहरबानी साफ तौर पर दिखाई दे रही है।बताना लाजमी है की उक्त हॉस्पिटल के पास नर्सिंग होम एक्ट के तहत न कोई स्ट्रेकचर है , न रैंप है और न ही पार्किंग सहित तमाम सुविधाएं।उसके बाद भी धड़ल्ले से 2 सालो से नियम की धज्जियां उड़ाते हुए बेरोकटोक हॉस्पिटल का संचालन जारी है।जो स्वास्थ विभाग की सह पर इनका अवैध कारोबार खूब फल फूल रहा है।वही जिन अधिकारियों को अवैध हॉस्पिटल ,पैथलाजी,क्लीनिक पर कार्यवाही करने करने अहम जिम्मेदारी है वह नोडल अधिकारी को खुद के क्लीनिक के फुर्सत नही।साहब नोडल अधिकारी के पद में बैठकर केवल सरकार का डीजल पेट्रोल बर्बाद कर केवल सड़क नापने बस का काम कर रहा है।इनको सरकार के कार्यों में कोई दिलचस्पी नहीं क्योंकि साहब का लाखो रूपए वेतन तो इन्हे समय पर मिल ही जा रहा है।

वही इस बारे में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने ने बताया की रामामुकता को अभी नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस नहीं दिया गया है।उनका प्रकरण अभी कलेक्टर मैडम के पास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *