भुवन पटेल@कवर्धा। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सुरक्षित प्रसव कराने के लिए तरह तरह के हथकंडा अपना जा रहा है जो सफल भी हो रहा है लेकिन कुछ लोगो के वजह से स्वास्थ्य विभाग बदनाम हो रहे हैं लोगो के मनोबल कमजोर हो जाता है जिसके चलते अस्पताल और वहां पदस्त डॉक्टरों के प्रति भरोसा खत्म हो जाता है । 22 -23 जनवरी को नेमसिंह मरकाम पिता कमल मरकाम ग्राम जामुंनपानी ने अपनी पत्नी के जचकी कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला लेकर गया जहां पर डयूटी में तैनात डॉक्टर के आर रात्रे ने भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए अपने प्रोटोकाल से इलाज करके रिफर किया और रिफर सेंटर जिला अस्पताल पहुचने से पहले जच्चा-बच्चा की मौत हो गई ।
भारत सरकार के गाइडलाइंस को किया किनारा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला में पदस्थ डॉक्टर के आर रात्रे द्वारा प्रसव के दौरान जमकर लापरवाही बरती गई । शासन के द्वारा जारी गाइडलाइन को किनारा करते हुए मनमानी किया । गाइडलाइन के अनुसार एठन /झटके आने पर महिला को बाए करवट लिटाकर श्वसन नली की रुकावट दूर करे (एठन खत्म हो जाने के बाद मुह को बन्द करने के लिए किसी गद्दीदार चीज का प्रयोग किया जाता हैं )हल्के से मुह में जमा द्रव (लार) को साफ करें ।प्रत्येक कूल्हे में मैग्नीशियम सल्फेट 5 ग्राम (10 मिली, 50%)का इंजेक्शन ड्रिप आई एम दिया जाता है । प्रसव होने का है तो प्रसव कराए और एम आर यू को रेफर करे यदि प्रसव होने में समय लग रहा है तो तत्काल एम आर यू को रेफर करे यह प्रोटोकॉल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा जारी दिशा निर्देश में है और प्रत्येक प्रसव कक्ष में प्रदर्शित है जिससे किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो लेकिन वहां पर ड्यूटी कर रहे डॉक्टर के द्वारा इंजेक्शन कंपोस्ड (इंजेक्शन डाइजेपाम् ) इंजेक्न सेफ्ट्रिक्ज़ोन, इंजेक्शन लेशिक्स् उपयोग किया गया हैं जो अस्पताल के ओ पी डी रजिस्टर के 3572 नम्बर में दर्ज है।
शिकायत जांच में लीपापोती
जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में मुख्यचिकित्सा एव स्वास्थ्य अधिकारी तीन फरवरी एव जिला कलेक्टर को 4 फरवरी को गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के द्वारा लिखित में किया गया है । उक्त शिकायत पत्र में घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी का उल्लेख किया गया है । जिसमे स्प्ष्ट लिखे हैं कि जच्चा-बच्चा में किसी प्रकार की कोई पूर्व बीमारी नही था । गलत उपचार के कारण मौत हुआ है जिससे अस्पताल से लोगो का भरोसा खत्म हो रहा है गोड समाज और समिति दोनों में आक्रोश है । सूत्रों की माने तो जांच अधिकारी ने अपने विभाग के बदनामी न हो करके झाड़ फूक का हवाला देते हुए अपना पडला झाड़ लिया है । शासन के गाइडलाइंस को नजरअंदाज करते हुए गलत इंजेक्शन का इस्तेमाल ड्यूटी में तैनात डाक्टर के आर रात्रे के द्वारा किया गया है जिसके चलते जिला अस्पताल पहुचने से पहले जच्चा-बच्चा की मौत हुई है ।
ऐसा कई मामले है यहां
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला में ऐसे कई मामले है जो डॉक्टर को भगवान मनाते हुए और ग़रीब तबके के होने के कारण ऊपर शिकायत नही कर पाते जिसका बेजा लाभ वहां पदस्थ चिकित्सक के द्वारा उठाया जा रहा है नाम हिरवंतीन पति सुमरन सिंह बैगा इसका डिलीवरी 8/03/2022 को सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र झलमला मे हुआ , बच्ची कमजोर थी इसलिए माँ का दूध नही पी रही थी उसे रेफर करने के बजाए तीन दिन अस्पताल में ही रखे रहे और 12/03/2022 को अस्पताल से छुट्टी होने के एक दिन बाद बच्ची का मृत्यु हो गई, वही फुलकुवर पति मंगलू सिंग इनका 2 माह के बच्ची को इलाज हेतु 14/03/2022 को सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र झलमला लाया गया बच्ची को सांस लेने में तकलीफ हो रहा था डॉक्टर ने बच्ची को न तो इंजेक्शन दिया न ही आक्सीजन जिसके चलते 15/03/2022 को मृत हो गयी ।

