परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद।
जिला स्वास्थ विभाग गरियाबंद द्वारा दिखावटी के लिए की गई झोलाछाप डाक्टरों पर कार्यवाही व सील क्लीनिक फिर खुल गया।जिसके बाद एक बार फिर इन झोलाछाप डाक्टरों का अवैध कारोबार विभाग की सह पर खूब फल फूल रहा है। नर्सिंग होम एक्ट और उच्च न्यायालय की आदेशों को पालन कराने में स्वास्थ विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। नतीजन जगह-जगह झोलाछाप डॉक्टरों ने अपना अवैध कारोबार खोल मरीजों को जान जोखिम में डालकर उनकी जेब ढीली कर मरीजों को मौत के मुंह में धकेलने से भी गुरेज नहीं कर रहा है।जिन जिम्मेदार अधिकारियों को इन अवैध कारोबार को पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है वो एक तरफ चढ़ावा लेकर झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध कारोबार का सरगना तो बना हुआ है, दूसरी ओर ये जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के विपरीत खुद के क्लीनिक चलाने में मस्त हैं।
जबकि उच्च न्यायालय द्वारा नियमों के विपरीत अवैध क्लीनिक व झोलाछाप डॉक्टरों पर कड़े कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।लेकिन विभाग के नोडल अधिकारी शासन के निर्देशों व अपने कर्तव्यों से ज्यादा खुद के दुकान चलने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे है, और साहब मॉनिटरिंग के नाम पर केवल डीजल पेट्रोल बर्बाद कर सड़क नापने बस का फॉर्मेलिटी पूरी कर शासन को पलीता लगाने में लगे है।
आपको बता दें की बीते साल भर पूर्व मीडिया द्वारा इन झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध कारोबार को लगातार खबर प्रकाशन कर उजागर किया था। जिसके बाद अपनी साख बचाने स्वास्थ विभाग ने खानापूर्ति कार्यवाही कर स्वास्थ के अवैध कारोबारियों को हलफनामा और कुछ जुर्माना भरवाकर छोड़ दिया और उनका सील क्लीनिक खोल दिया गया। जिसमें छुरा ब्लॉक के ग्राम मडे़ली के झोलाछाप डॉक्टर मोहन साहू और खड़मा के पलास कुमार विश्वास का क्लीनिक कुछ साल पहले विभाग द्वारा सील किया गया था। लेकिन दो चार माह बाद खोल दिया गया। जहां आज ये दोनों झोलाछाप डॉक्टर सारे नियमों को ताक में रखकर खुलेआम अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन हर तरह के गंभीर बीमारियों का इलाज बेधड़क कर रहा है। ऐसा नहीं की इस बारे में विभाग के आला अधिकारियों को पता न हो, विभाग के देखरेख में ही इनका गोरखधंधा फल फूल रहा है।
