आम जन की जिंदगी और मौत से जुड़े मामलों में कितने संजीदा हैं अधिकारी??,,,लाइफ सपोर्ट सिस्टम को लापरवाही पूर्वक शिफ्टिंग मामले में डेढ़ माह बाद भी कार्यवाही तय नहीं,,स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव भी हुवे थे हैरान

सी एम /एच एम के जिले में जन प्रतिनिधि और उच्च अधिकारीयों ने भी गंभीर मामले में नही दिखाई कोई रुचि

दुर्ग ( न्यूज 24 कैरेट /सतीश पारख) आज से लगभग डेढ़ माह पूर्व जनता की जिंदगी और मौत से जुड़ा एक मामला मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के जिले में सामने आया था।मामला था बड़ा गंभीर जिस पर स्वयं स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने भी हैरानी व्यक्त की थी।जिम्मेदारी अधिकारी ने भी बड़ा ही हैरान कर देने वाला और गैर जिम्मेदाराना बयान दिया था।
उक्त मामले में डेढ़ माह बीतने के बाद भी किसी पर जिम्मेदारी तय ना होना इस बात का प्रमाण है की जिले के जन प्रतिनिधि और उच्च अधिकारी आम जनता के हितों के प्रति कितने संजीदा और जागरूक हैं।
मामला था करोना के घटते मामलों के बाद आक्सीजन सपोर्ट सिस्टम से जुड़ी मशीनों को चंदूलाल चंद्राकर कालेज कचांदुर के कोविड़ सेंटर से बीएसपी के जंबो कोविड सेंटर में शिफ्ट करना।जिसमे 54 वेंटीलेटर,19 एचएफएनसी,सहित 266 लाइफ सेविंग मशीनों को ट्रेक्टर में लोड कर शिफ्ट किया गया था। जिसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने भी हैरानी व्यक्त की थी । और तो और इस मामले में करोना से जुड़े जिम्मेदारी नोडल अधिकारी एडीएम दुर्ग नूपुर राशि पन्नू ने भी गैर जिम्मेदारना बयान देते हुवे कहा था की मशीनें खराब हुई तो उसे बनवा लेंगे।शिफ्टिंग के बाद चेक करेंगे की मशीनें खराब हुई या नहीं। इस प्रकार के व्यक्तव की एक जिम्मेदार अधिकारी से उम्मीद नहीं की जा सकती। एक्सपर्ट ने उक्त मामले में कहा था की वेंटीलेटर संवेदनशील मशीन है जिसका रख रखाव व सुरक्षा जरुरी है । करोना काल में मामलों की कमी होने के बाद मशीनों को सुरक्षित रूप से पैकिंग करके रखा जाना चाहिए था किंतु ऐसा ना कर खुली मशीनों को वो भी ट्रेक्टर के माध्यम से शिफ्टिंग करना घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है।

वेंटीलेटर जिसकी करोना काल में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।अब जब करोना पीरेड खत्म अथवा कम हो गया है तो नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी थी की अपने मातहत अधिकारियों को निर्देशित कर मशीनों को सहेज संभाल कर सुरक्षित ढंग से रखवाते।किंतु उन्होंने करोना उपरांत मशीनों के रखरखाव में कोई ध्यान नहीं दिया अपितु ट्रांसपोर्टिंग भी बिना पैकिंग किए ट्रेक्टर के माध्यम से असुरक्षित ढंग से भिजवाया।जिससे लाखों की लाइफ सपोर्ट मशीनों के टूट फुट की संभावना बनती है। इस कृत्य के उजागर होते ही स्वास्थ्य मंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुवे जांच व कार्यवाही की बात की थी।किंतु आज दिनांक तक ना ही जांच दल का गठन हुवा ना ही कोई जांच हुई।ना ही दोषियों पर कार्यवाही तय हुई।ऊपर से जिम्मेदारी अधिकारी का कथन घोर लापरवाही को प्रदर्शित करता है।

उक्त मशीनें करोना काल में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा करोना के बढ़ते मामलों के कारण जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से खरीदी गई थी।जिसकी एक एक की कीमत लाखों की है।जिसके अभाव के चलते अनेक स्थानों पर लोगों की जाने भी चली गई ।इस पर गहन विचार आवश्यक है ।ऐसा कृत्य क्षमा योग्य नहीं है इस मामले में बिना देर किए दोषियों पर कठोर कार्यवाही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में आम जनता के स्वास्थ्य जिंदगी और मौत से जुड़े ऐसे मामलों में कोई लापरवाही ना करे।

स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव

उनके मोबाइल नंबर 9425254054 पर कॉल करने पर अटेंड नही होने से कोई व्यक्त्व नही लिया जा सका।

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