संदीप मिश्रा का माँ को श्रद्धांजलि,,
मृत्यु ,,सत्य है जिसे कोई हरा नही सका है जो दुनिया मे आया है उसे जाना ही है चाहे वह कोई भी हो पर जिस परिजन , रिश्ता ,परिवार के साथ जीवन का सुख दुख बिता हो तब उस समय बड़ा दुःख होता है पर क्या करे लिखा है जिसे कोई नही जानता है पर बिछुड़ना भी है ऐसे ही दुख की घड़ी आई 5 अप्रैल की आधी रात के बाद लगभग डेढ़ बजे यानि 6 अप्रैल प्रारम्भ हो गया था तिथिनुसार चैत्र मास कि पंचमी तिथि को जब प्रयागराज जिला के जनपद के ग्राम कपडौरा महाराज के पुरवा निवासी 70 वर्षीय श्रीमती शोभा ठाकुर का ह्रदयघात से निधन हो गया वे हेमवतीनन्दन बहुगुणा के समय से समाज सेवा में लगे अर्कनाथ ठाकुर की धर्मपत्नी थी श्रीमती शोभा ठाकुर अपने पीछे दो पुत्री मंजू मिश्रा एवँ प्रीति झा के अलावा दो दामाद तीन नातिन अंकिता, निकिता परिणिता ,दो नाती दामाद एवँ एक पन्ति से भरा पूरा परिवार छोड़ कर चली गई उनके घर मे भी भतीजे, भतीजियों ,नाती पोतों से भरा समृद्ध परिवार है एक भतीजे अंजनी ठाकुर भारतीय जनता पार्टी नारी बारी मण्डल के अध्यक्ष है तो बांकी भतीजे जीवन यापन के लिये कार्य कर रहे है
स्वर्गीय शोभा ठाकुर के अंतिम यात्रा के समय बड़ी संख्या में लोग उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि दिए,,, लोग आपस मे चर्चा कर रहे थे तो उसमें जो बातें सामने निकल कर आई वह यह था कि उन्हें लोगों के अन्नपूर्णा की संज्ञा दी किसी ने कहा कि प्रयागराज के।कुंभ मेला प्रतिदिन 150 लोगो को भोजन खिलाना ,एवं आवास की व्यवस्था करती रही है एक व्यक्ति ने अपने साथ घटी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक दिन घूमते हुए उनके घर गए उनके साथ 10 लोग थे उन्हें पता था कि घर मे आटा नही है बात बात में मजाक कर दिया नेताइन चाची (ग्राम में प्रचलित उनका निक नेम) को कि रोटी खिलाओ तो शोभा ठाकुर ने उस मजाक को चैलेंज में लिया कब जंवार,गेंहू को दरवा कर मंगवाई और कब रोटी सब्जी बनाई किसी को पता नही चला जब उनके सामने कद्दू की सब्जी एवं रोटी परोसे गई तब उन्हें आभास हुआ कि हम लोग आपस मे बतियाये रहे इधर माता का भोजन तैयार हो रहा था जिसे देखकर सभी आश्चर्य मिश्रित भावनाओ के साथ भोजन किया एवं साक्षात अन्नपूर्णा को प्रणाम किया उनकी लोकप्रियता ऐसे थी कि एक बार निर्विरोध ग्राम पंचायत की पंच भी निवाचित हुई ऐसे नही है कि शोभा ठाकुर पिता कुलानन्द झा जी का दिया हुआ नाम* मीनू,* कपडौरा में “”नेताईन चाची”” के नाम से सब जुबान में बसी यह महिला अपने जीवन मे मायके पक्ष विन्ध्याचल एवं मण्डला में तीन भाई भाभी,दो बहन छोटी ,सिमा एवँ अपने घर कपडौरा में एक जेठ (मालिक),दो देवर दिवानाथ (मास्टर), काँतेश्वर(भईया) नाथ,जेठानी,देवरानी के साथ सामंजस्य बना कर अपना जीवन गुजार दिया सभी ने कहा कि ऐसी धर्मात्मा,सब को समझा कर चलने वाली महिला कभी किसी ने नही देखा ऐसे नही है कि इतना सब कुछ करने वाली के जीवन मे भी बहुत कष्ट परेशानी सही उनके साथ उनके पति अर्कनाथ ठाकुर हमेशा साथ रहे बीमार पड़ती थी तो रात रात को जागकर देखभाल करना समय पर दवाई देना,24 घण्टे देखभाल करना उनके दिन चर्या में शामिल रहा सबसे अकेलापन उनके पति के ही साथ जुड़ गया बड़े बड़े कष्टों को हराकर मौत से जितने वाली सब का ख्याल रखने वाली को भगवान ने जल्दी एवँ आसानी से बुला लिया वह भी नवरात्रि पर्व का पंचमी दिन ,सोहागन सभी ने यही कहा कि उनके जीवन का पुण्य प्रताप है कि माता दुर्गा ने अपने धाम में बुला लिया हो सकता है माता दुर्गा को उनके पूण्य का उपयोग कहीं और करना होगा बताते है कि कुछ देर पहले ही दुर्गा माता की आरती की थीं वे दुर्गा एवँ उनके पति भगवान के भक्ति में ही लगे रहते है भले ही सांसारिक में उनसे जुड़े लोगों को उनके जाने का भारी दुख है लेकिन उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई है ऐसे नही है कि वह अदृश्य होकर भी सबका ख्याल रखेगी ,,जिंदगी का सफर है ऐसा सफर कोई समझा नही कोई जाना नही
