स्वास्थ विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से पाण्डुका और पोंड में झोलाछाप डॉक्टरों का फल फूल रहा है अवैध कारोबार
दर्जनों शिकायत के बाद भी आज तक नहीं हुई कोई कार्यवाही,आखिर लोगो की स्वास्थ के साथ खिलवाड़ करने वाले इन अवैध कारोबारियों को सरंक्षण किसका,अधिकारी,नेता, जनप्रतिनिधी या फिर किसी और का..

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद,गरियाबंद स्वास्थ विभाग लोगो की स्वास्थ के साथ खिलवाड़ करने वाले अवैध कारोबारियों पर किस तरह से मेहरबान है और किस तरह से संरक्षण दे रहा है इसके बारे में पूरे जिलेवासियों को भली भांति पता है।क्योंकि जिला स्वास्थ विभाग लापरवाहियों का गढ़ बन गया है।जिसे शासन के कार्यों,अपने दायित्वो सहित आम जनता की स्वास्थ से कोई सरोकार नहीं है।इसका सबसे बड़ा कारण जिले में स्वास्थ विभाग में ओहदे पदो पर बैठे वो तीन अधिकारी है।जिन्हे अवैध क्लीनिक, पैथालाजी,हॉस्पिटल सहित झोलाछाप डाक्टरों पर लगाम लगाने की अहम जिम्मेदारी दी गई है।लेकिन ये अपने जिम्मेदारियों के प्रति सजग नही है। शासन और उच्च न्यायालय द्वारा आम जनता की स्वास्थ को ध्यान में रखकर इन अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और त्वरित कार्यवाही करने के स्पष्ट निर्देश दिए है।लेकिन जिन अधिकारियों के ऊपर यह जिम्मेदारी है वे शासन के कार्यों के प्रति गंभीर नहीं है और उच्च न्यायालय के आदेश को खुलेआम ठेंगा दिखाने में लगे है।
आपको बता दे की गरियाबंद जिले में सैकड़ों अवैध क्लीनिक, पैथालाजी सहित निजी हॉस्पिटल है।जो नर्सिंग होम एक्ट और सारे नियम ,कानून ,कायदा के विपरित संचालित हो रहा है।लेकिन इन अवैध कार्यों पर लगाम लगाने की जिन्हे जिम्मेदारी दिया गया है वही अधिकारी अपने कर्त्तव्यो के प्रति गंभीर लापरवाही बरतते हुए खुद अवैध क्लीनिक संचालित करने में मस्त है। ऐसे में वे क्या अवैध कारोबार पर लगाम लगा पाएंगे ये सबसे बड़ा सवाल है।
पोंड और पांडुका में अवैध क्लीनिक और पैथलाजी की भरमार ,शिकायत पर आज नही हुई कोई कार्यवाही
जिले के छुरा ब्लॉक स्थित पाण्डुका और पोंड में वर्षो से अवैध रूप से क्लीनिक और पैथलाजी का संचालन होते आ रहा है।जिसकी जानकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भलीभांति है।जिसकी दर्जनों बार शिकायत किया गया।लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।पोंड में रोशन निर्मलकर और दिनेश साहू दो ऐसे झोलाछाप डॉक्टर है जो स्वास्थ विभाग के साथ तगड़ा सेटिंग कर अपना डॉक्टरी का अवैध कारोबार खूब चला रहा है।जिसकी शिकायत करने पर विभाग ने इन दोनो डाक्टरों को शटर बंद कर इलाज करने का बड़ा फार्मूला दे रखा है और तो और क्लीनिक संचालन न करने संबंधी शपथ पत्र भी ले लिया है ताकि विभाग को कोई पूछे तो कह सके की ये झोलाछाप डॉक्टर तो शपथ पत्र दिए है और इलाज करना बंद कर दिए है।लेकिन हकीकत यही है आज भी पोंड के ये दोनो झोलाछाप डॉक्टर शटर बंद कर बंद कमरे में मरीजों का इलाज कर रहे है।ये वही झोलाछाप डॉक्टर है जो अपनी करतूतों को छिपाने मीडियाकर्मियों पर हमला करने से भी गुरेज नहीं करता है।इसके बाद भी इनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद है।वही सूत्र बताते है की जब इस बारे में खबर प्रकाशन होता है तो विभाग के लापरवाह अधिकारी सरकारी गाड़ी पकड़कर चाय पीने और मिठाई खाने पहुंच जाते है। हम किस मिठाई की बात करे है उसे आप भली भांति समझ रहे होंगे।साफ शब्दों में कहा जाए तो ये की जब मीडिया झोलाछाप डॉक्टरों का खबर छापता है तो स्वास्थ विभाग उस खबर की आड़ में अपना हाथ साफ कर लेता है।मीडिया की खबरों पर स्वास्थ विभाग की चांदी ही चांदी है।वही पाण्डुका में शांति,प्रज्ञा और ज्योति नाम से तीन अवैध पैथालाजी संचालित है जिस पर विभाग द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया।पाण्डुका के नरोत्तम साहू के क्लीनिक पिछले वर्ष विभाग ने दिखावे के लिए दो चार माह सील तो जरूर कर दिया था।उसके बाद सील खोल दिया।जिसके बाद उक्त झोलाछाप डॉक्टर नरोत्तम साहू विभागीय संरक्षण में गांधी चौक स्थित अपने निवास में सारे नियमो का मौखौल बनाते हुए बेधड़क इलाज कर रहे है।जो विभाग की मिलीभगत को साफ दर्शाता है।वही गरियाबंद स्वास्थ विभाग के जिम्मेदारो का गैर जिम्मेदाराना जवाब हमेशा देखने को मिलता है और हर बार यही कहते है की जिले में कोई भी अवैध क्लीनिक, पैथालाजी और झोलाछाप नही है।आखिर साहब कौन से चश्मे से देखता है ये समझ से परे है ।लेकिन सवाल ये है की जो मीडिया को दिखाई देता है वो विभाग के अधिकारियों को क्यों दिखाई नही देता या फिर जानबूझकर देखना नही चाहता।जबकि जिले में स्वास्थ विभाग में जंहा देखो सैकड़ों अवैध क्लीन, पैथालाजी और निजी हॉस्पिटल की भरमार है।
स्वास्थ विभाग के सेटिंगबाज अधिकारी सालो से एक ही जगह अंगद की तरह जमाए हुए है पैर
गरियाबंद जिले में स्वास्थ विभाग में नोडल अधिकारी के जिम्मेदार पद पर पदस्थ डॉक्टर ए.के. हुमने सहित कई ऐसे अधिकारी है जो अंगद की तरह एक ही जगह पैर जमाए हुए है। जिससे कार्यालय में अव्यवस्था फैली हुई है वहीं कार्यालय और शासन के महत्वपूर्ण संबंधित काम प्रभावित हो रहा है जिससे लोग प्रभावित हो रहे हैं ।कुछ ऐसा ही ये अधिकारी स्वास्थ विभाग में करीब 15 वर्षों से अधिक समय तक ही एक जगह पर पदस्थ है और काम को भी प्रभावित कर रहे है। कार्यालय में अव्यवस्था ना फैले जिसके लिए स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाई जाती है। प्रशासनिक अधिकारियों को 1 जिले में 3 साल तक रखने के बाद उनका स्थानांतरण अनियंत्रित कर दिया जाता है पर गरियाबंद जिले में कुछ ऐसे भी अधिकारी है जो सफेद पेशो की मेहरबानी व अधिकारियों के मेहरबानियो पर अपने तय सीमा से अधिक जमे है। राजनीतिक नेताओं और उच्च अधिकारियों से अच्छी पकड़ होने के चलते इनका आज तक तबादला नहीं हो पाया।जिसके वजह से ये अधिकारी अपने कर्तव्यों के विपरित कार्य करने से भी बाज नहीं आ रहे है।जिसके चलते जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अवैध कार्यों को रोकने के बजाय सरंक्षण देने में लगे है।एक जगह लंबा समय तक रहने के वजह से ये अधिकारी मामलो में सेटिंग करने के गुर अच्छी तरह सिख गए है और स्वास्थ के अवैध कारोबारियों को खुला संरक्षण देने में लगे है।अब इस मामले को लेकर स्वास्थ संचालक से शिकायत की तैयारी हो गई है।जल्द ही इन लापरवाह अधिकारियों के करतूतों को उच्च विभाग को अवगत कराया जाएगा।
