जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग गरियाबंद का एक और कारनामा… पर्यावरण मंडल से अनुमति लिए बिना धड़ल्ले से कर रहे बांध से मिट्टी/मुरुम की खुदाई… अनुविभागीय अधिकारी और कार्यपालन अभियंता दोनों अधिकारी का तकनीकी ज्ञान शून्य, अधिकारियों ने बांध को खतरे में डाल दिया…. प्रीतम सिन्हा *ठेकेदार और प्रशासनिक अधिकारियों ने भ्रष्टाचार को बनाया शिष्टाचार *

रवींद्र दीक्षित,,छुरा से



छुरा……जल संरक्षण एवं सिंचाई के लिए बनाए गए बांध को मिट्टी/मुरुम के लिए बेतरतीब तरीके से खोदा जा रहा है। ग्राम फूलझर स्थित गोल्डाबांध में यह खनन किया जा रहा है। ठेका कंपनी ने बांध में अतिरिक्त जमा मिट्टी/मूरुम फिलिंग करने के बकायदा 2000 घनमीटर परिवहन का अनुमति मांग किया है। जल संसाधन एवं खनिज विभाग की अनुमति लेकर खनन कर रहे हैं, लेकिन विभाग के जिम्मेदार मौके का निरीक्षण नहीं किया है। नहर लाईनींग का कार्य करने वाली ठेका कंपनी बांध को मशीन से खोद डाला है। इससे बांध की उपयोगिता प्रभावित होना लाजिमी है। साथ ही आने वाले दिनों में बांध को खतरा है। बांध के पार से खोदाई से बांध अंदर से सिपेज होने पर बांध में पानी का भराव नहीं होगा। क्योंकि बांध के टोह के अंदर में बेतहाशा 4-5 फीट खोदाई कर दिया गया है। जिसमें बांध के फाउंडेशन के बराबर खोदाई से पानी सिपेज हो जाने बांध स्लीप हो जायेगा।

पर्यावरण मंडल देता है डेम की खुदाई के लिए अनुमति
जानकारी के अनुसार डेम की खुदाई के लिए अनुमति देने का अधिकार न जलसंसाधन विभाग के पास है ना खनिज विभाग के पास। ठेका कंपनी को पर्यावरण मंडल से अनुमति लेनी थी, जो नहीं ली गई। इस पर जिला खनिज अधिकारी ने कलेक्टर गरियाबंद से अनुमोदित कर ठेका कंपनी ने अनुमति खनिज व जलसंसाधन विभाग से ली है। पर्यावरण मंडल से नहीं ली है। और नाही अब तक दोनों विभाग ने मौके पर जाकर स्थिति का आकलन नहीं किया है।

चैन माउंटेन मशीन से कर दिया गोल्डाबांध डेम की खुदाई..
डेम के एक छोर में धड़ल्ले से खुदाई किया गया है। इसके लिए चैन माउंटेन का उपयोग किया गया है। पहले भी बांध की मिट्टी व मुरुम की खुदाई नहर लाईनींग के लिए किया गया है और अब इसी कार्य के लिए भी मुरुम को बेचा गया है। खनिज विभाग के अनुसार ठेका कंपनी को 20 हजार घनमीटर मुरुम खनन की अनुमति दी गई है। जल संसाधन विभाग ने भी खनन की अनुमति दी है। लेकिन दोनों विभाग के जिम्मेदार तय शर्तों के विपरीत हो रही खुदाई को झांककर भी नहीं रहे हैं। अंधाधुंध खनन के कारण गोल्डाबांध अधिक गहरा हो चुका है। इससे डेम के मूल स्वरूप को भी नुकसान पहुंचेगा।

गोल्डाबांध को खतरनाक ढंग से खोद दिया…
नहर निर्माण की ठेका कंपनी ने मशीन से इसकी खुदाई कर दिया है। यह सब सांठगांठ से किया जा रहा है। मामले के जानकार प्रीतम सिन्हा ने बताया कि बांध को खतरनाक ढंग से खोदा गया है। जलभराव होने पर वह बांध को खतरा हो सकता है। जबकि डूबान क्षेत्र में बांध के अधिकतम जल स्तर(MWL) क्षेत्र में नियमतः खोदाई नहीं हो सकता।अनुविभागीय अधिकारी ने बांध के पार को छोड़कर खोदने की अनुंशसा किया है और कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग गरियाबंद के द्वारा उसे अनुमति के खनिज अधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया। अनुविभागीय अधिकारी और कार्यपालन अभियंता दोनों अधिकारी तकनीकी ज्ञान शून्य, अधिकारियों ने बांध को खतरे में डाल दिया।

खनिज विभाग के अधिकारी और ठेकेदार की मिली भगत स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है
भाजपा नेता प्रीतम सिन्हा ने आरोप लगाया है कि जिला खनिज अधिकारी के अनुमति लेकर खनन किया गया जिसमें 20 हजार घनमीटर की अनुमति दी गई है। कितना खनन किया, पता नहीं है। ठेकेदार के आवेदन और अधिकारियों के प्रतिवेदनों में स्पष्ट रूप से गड़बड़ी दिखा दे रहा है। जबकि जिला प्रशासन के सारे बड़े जिम्मेदार अधिकारियों ने नियम को हासिये में डाल कर गैरकानूनी तरीके से ठेकेदार को लाभान्वित करने के उद्देश्य से बांध से मिट्टी मुरुम करवा दिया।जबकि चल रहे कार्य में सिर्फ और सिर्फ मुरुम का ही उपयोग होना है।

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