राजस्व विभाग ऐसी जमीनों का सीमांकन कर शासकीय कब्जा शुदा जमीनों को मुक्त कराने में अपनी महती भूमिका निभाए..
उतई(न्यूज24कैरेट/सतीश पारख)
नगर पंचायत उतई क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 02 मुख्य उतई खोपली मार्ग पर चालीसों साल से कांजी हाऊस निर्मित है जो जर्जरावस्था के कारण विगत नगर पंचायत कार्यकाल में नवीन निर्माण किया गया है ।किंतु दुर्भाग्य की उसके सामने के कब्जे पर किसी भी नगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। ज्ञात हो की बंदोबस्त पूर्व भी उक्त भूमि राजस्व रिकार्ड में धरसा भूमि दर्ज है तथा उससे लगी लगानी भूमि भू मालिक द्वारा बेची गई है।यहां पूरा खेल बंदोबस्त के बाद लगानी भूमि के आबादी होने के बाद खेला गया है।लगानी जमीन के कुछ हिस्से को खरीदकर धीरे धीरे धरसा भूमि पर कब्जा हुआ उपरांत राजस्व के अधिकारी पटवारी आर आई से मिलीभगत कर आबादी भूमि का नजरी नक्शा बनवाकर उसे आपस में ही रजिस्ट्री करवाकर उक्त भूमि को अपनी बताया गया?? जबकि खरीददार की लगानी भूमि बमुश्किल दो ढाई डिसमिल है?? जिसके मूल लगानी भूमि रजिस्ट्री दस्तावेजों के अवलोकन से स्पष्ट हो जाएगा??तथा दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। शासकीय भूमि पर कब्जा कर यह खेल का मामला मात्र यह एक नही है ।यह खेल अनेक भूमाफियाओं द्वारा खेला जाता है ??जिसमे राजस्व के लोगों की मिलीभगत स्पष्ट होती है??बहुतायत कालोनी निर्माता ऐसी लगानी जमीनें देखते है जिससे लगी शासकीय भूमि चाहे वो आबादी घांस हो या धरसा भूमि जिस पर कब्जा कर यह सारा खेल खेला जाता है ??इससे फायदा यह होता है की राजस्व रिकार्ड अनुसार दर्ज भूमि कटिंग कर पूरी बेच दी जाती है ??तथा शासकीय भूमि रोड़ के नाम पर छूट जाती है ??जिससे उक्त प्लाट कर्ताओं की खरीदी लगानी भूमि पूरी की पूरी बिक्री कर ज्यादा लाभ कमाया जाता है ??प्रशासन में बैठे विभागीय लोग या तो इस और ध्यान नहीं देते या जानबूझकर अनदेखी करता है यह सारी बातें जांच में तथा राजस्व रिकार्ड अनुसार सीमांकन करने से स्पष्ट हो सकती है ???अब आवश्यकता है की विभाग व प्रशासन अपनी मजबूत इच्छा शक्ति से ऐसे प्लाटों अथवा कालोनी निर्माताओं की जांच करे तथा शासकीय भूमियों पर कब्जों को खाली करवाने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करे ताकि ऐसे भूमाफियाओं पर लगाम लग सके तथा शासकीय जमीनों को कब्जों से मुक्त करवाया जा सके??
