भिलाई( न्यूज24 कैरेट/सतीश पारख) जिले के हथखोज स्थित दुर्गा स्टील रोल्स फैक्ट्री के अंदर से एक टैंकर बायोडीजल से भरा हुआ जब्त किया गया है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री मालिक समर सिंह कई महीने से बिना जिला प्रशासन की अनुमति के बायोडीजल का उपयोग कर रहा था। पुरानी भिलाई पुलिस रविवार दोपहर यहां छापेमार कार्रवाई करके टैंकर सहित बायोडीजल को जब्त किया। पुलिस ने फैक्ट्री के मैनेजर चंद्रशेखर सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं फैक्ट्री मालिक मौके से फरार है।
पुरानी भिलाई टीआई विनय सिंह बघेल ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि दुर्गा स्टील फैक्ट्री में कई महीने से दूसरे राज्य का टैंकर आता है और फिर चला जाता है। इस पर पुलिस एक्टिव हो गई। रविवार दोपहर उन्हें सूचना मिली कि फिर से दुर्गा स्टील में डीडी 01 सी 9468 नंबर का टैंकर आया है। पुलिस ने तुरंत वहां जाकर छापा मारा। इस दौरान फैक्ट्री के अंदर बकायदा बायोडीजल से भरा टैंकर और उससे डीजल खाली करने करने के लिए इलेक्ट्रिक लिफलिंग मशीन मिली। टैंकर के अंदर 29 हजार 452 लीटर बायो डीजल था। पुलिस ने लगभग 21 लाख रुपए का डीजल व रिफलिंग मशीन को जब्त किया है। पुलिस ने फैक्ट्री के अंदर से वहां के मैनेजर चंद्रशेखर सिंह को गिरफ्तार किया है। फैक्ट्री मालिक समर सिंह मौके से फरार हो गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 102 के तहत कार्रवाई की है।
सूत्रों की माने तो दुर्ग जिले में बायोडीजल बेचने का काला कारोबार काफी दिनों से चल रहा था। यहां भिलाई के हथखोज क्षेत्र और दुर्ग के पुलगांव क्षेत्र में अवैध रूप से बायोडीजल बेचा जा रहा है। पुलिस के मुताबिक दुर्गा स्टील का मालिक मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का रहने वाला है। वह वर्तमान में गुजरात राज्य में रहता है। इससे वह वहां से सस्ते दर में बायोडीजल खरीदकर यहां बायो डीजल भेजता था। इस तरह वह हर एक दो दिन की आड़ में दूसरे राज्य से हजारों लीटर बायो डीजल मंगाकर अलग-अलग क्षेत्र में बेचने के लिए भेजता था। ऐसा करके यह लोग मोटा मुनाफा कमाते थे और सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा चुके हैं।
दुर्ग के जिला खाद्य अधिकारी सीपी दीपांकर ने बताया कि बायोडीजल रतनजोत व अन्य बनस्पति से तैयार किया जाता है। इसके अलावा अभी धान से एथेनॉल तैयार कर डीजल व पेट्रोल में मिलाकर भी इसे बेचा जा रहा है। बायोडीजल बाजार में 70 से 75 रुपए लीटर कीमत में मिल जाता है। वहीं डीजल 98-100 रुपए के बीच है। ऐसे में ट्रक मालिकों को एक लीटर के पीछे 20-25 रुपए की बचत हो जाती है। इसी के लालच में वह लोग बायोडीजल खरीदते हैं और उससे वाहन को चलाते हैं। खाद्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बायोडीजल बेचने के लिए भी पेट्रोल पंप की तरह लाइसेंस लेना पड़ता है। छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें तो अभी राजनांदगांव, कोंडागांव, रायगढ़ जैसे कुछ गिनेचुने जिलों में ही बायोडीजल के पंप हैं। दुर्ग जिले में नहीं होने से इसकी काफी डिमांड है। ऐसे में यहां दूसरे राज्यों से बायोडीजल मंगाकर ब्लैक में बेचा जा रहा है।
