news24carate/सतीश पारख की कलम से
राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना चुकी सरोज पाण्डे को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर नए चेहरों के साथ भाजपा चुनाव मैदान में दिख सकती है
छतीसगढ़(राजधानी)। देश के पांच राज्यो के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा काफी उत्साहित है।अब छग सहित अन्य राज्यो में दो साल बाद विधानसभा चुनाव है।जिसको लेकर गम्भीर चिंतन होने लगे है।ऐसा कहा जा रहा है कि होली के बाद छग व राजस्थान में गुजरात के भाजपा की टीम यहां दो साल रहकर मेहनत करेगी।परिणाम क्या होगा यह तो समय बतायेगा।लेकिन अभी कांग्रेस के अच्छे दिन नही चल रहे है।छग में सीएम भूपेश बघेल के जनहित योजनाओ से जनता के चेहरे में स्पष्ट खुशी दिख रही है ।जिसे एकाएक बदल पाना काफी मुश्किल दिख रहा है।ख़ासकर छग के सरकारी कर्मचारियो को पेंसन का लाभ योजना छग में संजीवनी का काम करेगा। होली के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 25 मार्च से सभी 90 विधानसभा का दौरा करके वहाँ के कार्यो से मंन्त्री विधायक के परफोर्मेंश की जमीनी जानकारी लेंगे।यह भी तय है कि कांग्रेस के आधे से अधिक कमजोर विधायको की टिकट कटेगी। छग में भाजपा तीन साल में कोई बड़ा आन्दोलन नही कर पाई है गुटबाजी से वे निकल नही पा रहे है।चार राज्यों की जीत के बाद भी भाजपा के लिए छत्तीसगढ़ आसान नहीं। प्रमुख विपक्ष होते हुवे भी भाजपा इस भूमिका को निभाने में नाकाम साबित हुई है।चार राज्यों की जीत से छत्तीसगढ़ के भाजपाइयों में ऊर्जा का संचार तो हुवा है किंतु सरकार की कमजोरियों जमीनी स्तर पर विरोध करने में भाजपा नाकाम साबित हुई है। वहीं ढाई ढाई साल वाले मुद्दे ने भी कांग्रेस की फजीहत ही की है ।इस बात का भी बाजार गर्म रहा है की उत्तरप्रदेश चुनाव के बाद कुछ हो सकता है । अब चुनाव भी निपट चुके है इस बात की चर्चा भी जोरों पर है की मुख्यमंत्री बघेल को अन्य प्रदेशों में दी गई जवाबदेही के बाद भी पार्टी के अच्छे प्रदर्शन ना होने के कारण इस बात को हवा मिलेगी और होली उपरांत छत्तीसगढ़ में पुनः खेला हो तो यह बात आश्चर्यचकित करने की नही होगी।दुर्ग जिले में खासकर जो सरकार के चार प्रमुख आधार स्तंभों का जिला है यहां तो भाजपाइयों की सत्ता से सेटिंग की बात भी समय समय पर सुनने में आती है।भाजपा को सत्ता हासिल करने चामत्कारिक रूप से 75 से 90 प्रतिशत नए चेहरे आगे लाने होंगे साथ ही आयातित प्रत्याशियों से परहेज करते हुवे क्षेत्र के सक्रिय युवा प्रत्याशियों को आगे लाना होगा।आने वाले समय मे राज्य सभा सदस्य सुश्री सरोज पाण्डे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने की योजना से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पकड़ का कोई जवाब नही है।उनके दुर्ग शहर से चुनावी मैदान में उतरने की संभावना है जहां पचास प्रतिशत स्थानीय तो पचास प्रतिशत अन्य सारे समाज है जिन्हे साधने में जो सफल होगा उसका बेड़ा पार होगा। लंबी राजनीति के खिलाड़ी रहे कांग्रेस के वरिष्ट नेता मोतीलाल वोरा के निधन उपरांत यह पहला चुनाव होगा जो बिना बाबूजी के कांग्रेस लडेगी।उनके पुत्र अरुण वोरा के लिए इस बार यह डगर आसान नहीं होगी।दूसरी तरफ वरिष्ठों को नकारते हुवे दुर्ग निगम में कांग्रेस की सत्तारूढ़ सरकार को सबसे पहले अपनों से ही निपटना होगा जिसका नुकसान भी अरुण वोरा को हो सकता है।क्या छग में भाजपा चार राज्यो के जीत का जश्न मना पायेगी या पुनः छग में कांग्रेस की सरकार बनेगी। जिसको लेकर भाजपा व कॉंग्रेस में बड़ा मंथन चल रहा है।पंद्रह साल बाद प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस में तीन सालों में जो दिखाई दे रहा है की 75 प्रतिशत जमीनी कार्यकर्ता या तो नेताओं से दूर हो चुके है जिन्हे सत्ता परिवर्तन के बाद पूछपरख ना होना नेताओं के दरवाजों पर उनका छोटा छोटा काम ना होना ।उनके मन में निराशा घर कर चुकी है अब देखना यह है की कांग्रेसी नेता अपने उन जमीनी कार्यकर्ताओं को मनाने में सफल होगी।या सत्ता के द्दंभ में उन्हे दरकिनार कर मैदान में होगी।हिंदुत्व की बात ने यदि जोर पकड़ा और भाजपा के कार्यकर्ता जमीनी पकड़ बनाने में मजबूत साबित हुवे तो ही बेड़ा पार होगा अन्यथा किसानों के लिए किए गए कार्य कांग्रेस के लिए लाभदायक साबित होंगे। आखिर में समय बताएगा की ऊंट किस करवट बैठता है।
क्रमश..02 शीघ्र
