एक एक इंच नपवा कर तुड़वाने वाले पीडब्ल्यूडी के अधिकारी ठेकेदार के काम के मामले में कुंभकर्णी नींद में सो जाते हैं??
आखिर का खेला है भाई अधिकारी और ठेकेदार के बीच??..असली मालिक जनता ये जानना चाहती है
वृहद पेयजल पाइप तोड़ कर किनारे कर दी गई पुल का निर्माण कर दिया गया जानो पुल पार वासियों को लाभ से वंचित रखना हो
उतई..(सतीश पारख)..लोक निर्माण मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच ना सिर्फ पुरे झोलझाल की चर्चा जोरों पर है अपितु सड़क की 42 फिट चौड़ाई के लिए सुबह से लेकर शाम तक टेप लेकर घूमते नजर आने वाले लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की आंखें शायद पुल निर्माण के वक्त बंद हो गई ।बंद कर दी गई।या सेटिंग के तहत फ्री छोड़ दिया गया। यह प्रश्न आमजनता के बीच अब सुगबुगाहट होने लगा है।
प्रदेश में अनेक पुल व सड़कों का निर्माण देखा जो सड़क से छह आठ इंच ऊपर ही देखने को मिला किंतु लोक निर्माण मंत्री के क्षेत्र में यह पुल पुरानी सड़क से भी आठ से दस इंच नीचे ढलाई कर दिया गया जबकि अभी सड़क के ऊपरी हिस्से में डामरीकरण होने के बाद सड़क और ऊंची हो जाएगी ऐसे में ठेकेदार या लोक निर्माण के अधिकारियों द्वारा पुल को सड़क के लेबल में करने एक फिट का डामरीकरण करवाया जाएगा यह बात समझ से परे है।
पुल निर्माण हेतु खुदाई के वक्त नगर के वार्डों में पुरानी पेयजल पाइप लाइन तोड़ दिए जाने से सप्ताह भर दो वार्ड के लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ा।अब इस टूट के लिए नगर पंचायत ने क्या कार्यवाही की यह उनकी बात है ।दूसरी पाइप लाइन जो भविष्य में शिवनाथ के पानी के नगर के घरों तक पहुंचाने पीएचई द्वारा नगर की वृहद पेयजल योजना के तहत बिछवाया गया था उस लाइन को भी ठेकेदार द्वारा तोड़ दिया गया है ।जो पुनः लगाए बिछाए बिना पुल का निर्माण कर दिया गया है ।क्या भविष्य में नगर के पुल पार वार्डों को वृहद पेयजल योजना के लाभ से वंचित रखना है या पीएचई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते लोक निर्माण विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी करने उतारू है यह सोचनीय विषय है।
खैर आगे देखना यह है की इन अव्यवस्थाओं पर नगर पंचायत अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का मौन भी अनेक तरह के संदेहों को जन्म देता हैं।
