अमित चंदूलाल चंद्राकर ने भूपेश सरकार के बजट पर दी अपनी प्रतिक्रिया

उतई(सतीश पारख)अमित चंदूलाल चंद्राकर ने भूपेश सरकार के बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुवे कहा की छत्तीसगढ़ सरकार का आज 2022-23 के लिए पेश बजट में
सरकार ने जो आत्मानन्द स्कूलों को बढाने की घोषणा की है वो काबिले तारीफ है। शिक्षा जितना सरल और आसानी से उपलब्ध होगा जन को उतना लाभ होगा। लेकिन मैं समझता हूं अगर बघेल सरकार स्वास्थ्य पर भी योजना बनाती तो मध्यमवर्गीय परिवार को और ज्यादा लाभ होता। आज प्रदेश की जनता महंगी स्वाथ्य व्यवस्था से जूझ रही है सरकार को चाहिए था कि हर जिले में एम्स जैसे हाईटेक स्तर का अस्पताल का निर्माण होता। जनता को रायपुर के सरकारी अस्पताल पर निर्भर नही होना पड़ता। हर जिले में कम से कम एक अत्याधुनिक स्वास्थ्य की सुविधा होनी चाहिए जैसे कि हार्ट लीवर किडनी एवम ब्रेन इसकी आम जन को बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि ऐसे मामलों में निजी अस्पताल की मोनोपोली है। इससे हमे निजात चाहिए।जिस पर बजट में कुछ नही है।
हर जिले में एक मेडिकल कालेज की योजना होनी थी भारत सरकार के साथ मिलकर 70:30 के रेशियो में कालेज बनाने की केंद्र की योजना का फायदा हमे लेना चाहिए ।
प्रदेश में रेत और खनिज माफिया का बोलबाला हो रखा है रेत सीमेंट लौह सामग्री में मनमानी रेट में वृद्धि ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। हम किसानों को न्याय योजनाओं का पूरा लाभ दे रहे है लेकिन उसका पैसा कही और से निकाला जा रहा है रेत ,सीमेंट की कीमतों में आग लगी हुई है।
हमे शहरी जनता के लिए भी योजना बनाना था। प्रदेश में संसाधन की बहुतायत मात्रा में होकर भी युवाओ को रोजगार नही मिल पा रहा खास कर इंजीनियरिंग के छात्र। इन्हें तो बाहर ही जाना पड़ता है। अन्य पड़ोसी राज्य उड़ीसा , आंध्र तेलंगाना के तर्ज पर IT पार्क बनने की योजना बनानी थी। सरकार ने पेंशन योजना की फिर से शुरुआत की है लेकिन मुझे लगता है कि उसके दूरगामी परिणाम सरकार पर आर्थिक भार पड़ेगा। जिसकी सज़ा शायद उस वक्त के युवाओ को चुकानी पड़ सकती है। सरकारी कर्मचारी अपने रिटायर के बाद ग्रेजुएटी तो लेता ही है अब उसे पेंशन भी मिलेगा मतलब सरकार पर आर्थिक भार।
2003 में अटल सरकार ने केंद्र में पेंशन स्कीम बन्द की थी लेकिन हमारे अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह सरकार ने उस स्किम की शुरुआत नही की क्यो की आर्थिक दृष्टि से वो सरकार को नई योजना बनाने से रोकता है।
छत्तीसगढ़ सरकार अच्छा कर रही हैं लेकिन लगता है कि और बेहतर किया जा सकता था।
अमित चंदुलाल चन्द्राकर
(पब्लिक पॉलिसी एंड इम्प्लीमेंटर)

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