ग्राम बटरेल में किया गया शिवलिंग की स्थापना ,तीन दिनों की लम्बी पूजा अर्चना के बाद किया गया स्थापना


पाटन। विधानसभा के ग्राम बटरेल के बोईर तलाब में स्थापित शिव मंदिर को नए रूप में निर्माण कर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पुन: प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ। बता गया की स्थापित शिवजी की विशेष महत्ता था। यहां शिव के पास ही नागदेव रहता था जिसे कई बार ग्रामीणों द्वारा दर्शन किया गया ग्राम के चमपेश्वर साहू ने बताया कि यहां जो नागदेव का मैने कई बार दर्शन किया उसकी खासियत यह था कि वे यह कभी सीधा ना चलकर राउंड में चलता था। शिव जी के पास एक बिल था। उसमें अंदर चला जाता था। यह मालगुजारी तलाब है यहां के मालगुजारो द्वारा इस तालाब का निर्माण किया गया है। वर्तमान में गोटिया परिवार के नाम से इस तालाब को जाना जाता है। इस तलाब के पानी की खासियत थी। इसलिए इसे पेयजल एवं नि स्तारी के लिए ही उपयोग में लाया जाता था। पूर्व में धान में संक्रमण बीमारी होता था। तो इस जल का उपयोग किया जाता है।
यह मंदिर दो साल पूर्व तूफान के समय वहां पर पीपल का पेड़ था। वह गिर गया था। जिससे मंदिर पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो गया था। उसे पुनः रूप नए रूप में निर्माण किया गया है।इसकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा शक्तिपीठ भानपुरी बजरंगबली मंदिर के पंडित जी लक्ष्मीकांत जी की टोली द्वारा तीन दिनो के पूजा पाठ के पश्चात किया गया।प्रमुख जजमान के रूप में डॉ दयाराम एवं धर्मपत्नी रामशिला साहू ने तीन दिनों तक पूजा-पाठ में भाग लिया।

वर्तमान में शिव परिवार को विख्यात प्रवचन कर्ता पंडित विष्णु अरोरा के मार्गदर्शन में स्वनिर्मित नर्मदा नदी में प्रवाहित ओमकारेश्वर से लाया गया है। जिसकी विशेष महत्ता है साथ ही उनके ही सानिध्य में पंडित लक्ष्मीकांत के साथ पांच पंडितों द्वारा प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हुआ। मंदिर स्थापना में ग्रामवासियों उत्साहित हैं स्थापना के समय ग्राम वासियों द्वारा मूर्तियों का नगर भ्रमण किया गया। विशेष रूप से ग्राम पंचायत के सरपंच अभयराम ठाकुर उपसरपंच श्रीमती खेमीन बाई साहू एवं समस्त पंच गण सहित दाऊ यादराम साहू,रामलाल साहू, टेमन लाल सपहा,विटल दाऊ,दिनानाथ, भोकलू राम साहू, मंथीर साहू, चपेश्वर साहू, नेमन दाऊ,चंद्रशेखर,श्रीमती मीणा बाई पूर्व सरपंच श्रीमती लोचन भाई पूर्व सरपंच जगदीश साहू चेतराम साहू ,पूर्णानंद साहू , डा हुनेन्द्र साहू सहित ग्रामीण जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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