प्रधानमंत्री भारत सरकार (नई दिल्ली) को प्रेषित पत्र..,,,,चिटफण्ड कंपनियों में राशि जमा कर फसने वाले आम उपभोक्ताओं को पैसे वापसी का आग्रह

चिटफंड मामले को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावितों को राहत प्रदान की जाय..

इसमें फंसकर हजारों की मौत हुई..लाखों परिवार उजड़ गए..करोड़ों प्रभावित हुवे..अरबों खरबों की राशि डकार ली कंपनियों ने युवा बेरोजगारों के माध्यम से लोगों को फंसाकर.

इतना बड़ा खेल बिना राजनीतिक व प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं..जितनी दोषी कंपनिया.उससे बड़े दोषी नेता और अधिकारी..सभी पर कार्यवाही तय हो??

छग..दुर्ग(सतीश पारख उतई)…राष्ट्रीय आपदा चिटफंड निवेशकों के पैसे वापसी के संबंध में
माननीय प्रधानमंत्री ये बिमारी कांग्रेस सरकारों में लगभग 35-40वर्ष पहले मिनिस्ट्री आफ कम्पनी अफेयर्स भारत सरकार के दफ्तरों द्वारा शुरू होकर पिनकाॅन(युनिवर्सल कोआपरेटिव सोसायटी),सहारा इंडिया,सांई प्रसाद,पल्स ग्रीन,साईं प्रकाश,गुरु साईं, जी एन गोल्ड,जी एन डेयरीज, एन एन सी एल, साईं राम,श्री साईं,सनसाईन हाईटेक, सनसाईन इन्फ्रा,श्रीराम,के एम जे,वी आई पी,यू ए एस के इंडिया,मानवा अंचल,कल्पतरू,रोजबेली,जी लाइफ,पर्ल पेन इंडिया,सोलर एनर्जी,स्काई टच हाऊसिंग कोआपरेटिव सोसायटी,बी एन पी,रीयल स्टेट एण्ड एलाइड लिमिटेड, मां चामुंडा एग्रोटेक प्रोड्यूसर, अन्नपूर्णा वानमिक,शारदा चिटफंड, सनसाईन हाईटेक, रिलायबल मेगा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड,आदि चिटफंड कंपनी के आयाम लिखते हुए 2014तक यह कारोबार खूब बुलंदियों को छुआ। करोड़ों बेरोजगारों को रोजगार भी दिया।भारत सरकार के रजिस्ट्रेशन को देखकर बीसों–पचीसों करोड़ लोग इसके चपेट में आ गए।और अरबों-खरबों में इनकी कारोबार पहुंच गया। जब तक 30-35वर्ष गुजर गया उस वक्त मिनीष्ट्री को जरा भी समझ नहीं आया कि ये चिटफंड अधिनियम है क्या ।जब 15अगस्त2014 आया तब केन्द्र सरकार व मिनीष्ट्री को चिटफंड अधिनियम याद आया होगा तभी 15अगस्त 2014 में सभी कंपनियों को अवैधानिक करार देकर बंद कर दिया गया और मामला EOW ,SEBI के पाले में यह कहकर डाल दिया कि अब नया निवेश ना लेकर 6 महीने के अंदर निवेशकों की पैसा वापसी किया जाय। मगर 2021 आ गया सारे निवेशक लोग कोर्ट,कचहरी, विधायकों,सांसदों, मंत्रियों को ज्ञापनों के माध्यम से अवगत करा कर थक चुके हैं। किंतु अब तक सब हांसी लाई जीरो है। अतः सम्माननीय प्रधानमंत्री जी व सम्माननीय राष्ट्रपति जी हम निवेशक गण कहां-कहां दर-दर की ठोकरें नहीं खा रहे हैं।ये चिटफंड नामक महामारी भारत के हर गांव में,हर जिले में, हर प्रदेश में फैल चुका है।इस बिमारी से हजारों व लाखों लोगों की मौत हो चुकी है, और बीस करोड़ से भी अधिक लोग पीड़ित हैं,सभी पीड़ित निवेशक लोग आपसे गुहार लगा रहे हैं कि इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर जो धन राशि कंपनियों के एकाउंट में जमा है और जहां भी उनके संपत्ति है उसे राष्ट्रीय संपत्ति घोषित कर निवेशकों की पैसा वापसी किया जाय तो,भारत में बहुत बड़ी जन धन की हानि होने से बचाया जा सकता है।
(सतीश पारख की रिपोर्ट)

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