जिम्मेदारो का शासन के आदेश को खुलेआम ठेंगा, ठसनबाज अधिकारी कर्मचारी अपने दायित्वों के प्रति बरत रहे है घोर लापरवाही,आमजन हो रहे है परेशान
परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद
जि़म्मेदार पद पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों की ठसनबाजी और लापरवाही के किस्से आए दिन जिले में सुनने और पढ़ने को मिलते रहता है।वही शासन के आदेश को हवा में उड़ाना अगर किसी को सीखना है तो गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर ब्लॉक के परसदाजोशी के शासकीय आयुर्वेद औषधालय से बेहतर उसके लिए और कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती।आम जनता को स्वास्थ सुविधा देने वाला फिंगेश्वर ब्लाक का आयुर्वेद औषधालय खुद बीमार चल रहा है। जहा ठसनबाज अधिकारी और कर्मचारी शासन के सारे आदेशों को खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए 12 बजे ही आयुर्वेद औषधालय में तालाबंदी कर रफूचक्कर हो जाते है।जो न्यूज 24 कैरेट की पड़ताल से सामने आया।जब इस मामले को लेकर बीते गुरुवार 3 मार्च को पड़ताल किया गया तो दोपहर 12 बजे ही इस औषधालय में ताला लगा हुआ मिला और कर्मचारी अधिकारी गायब मिले और 5 शाम बजे तक कोई भी अधिकारी कर्मचारी नही पहुंचे। छुट्टी की बात आती है तो ऐसे कर्मचारी अधिकारी उसका लाभ लेने में भी अग्रणी हो जाते हैं लेकिन जब तय समय में कार्यालय पहुंचकर काम करने की बात आती है तो ‘यह हम से नहीं होगा’ वाली स्थिति पैदा हो जाती है।यही हाल इस औषधालय का है जंहा रोज एक बजे ही तालाबंद कर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नदारद हो जाते है।इन जिम्मेदारो को शासन के कार्यों और जनता के प्रति कोई सरोकार नहीं है क्योंकि इन्हें तो इनका वेतन समय पर मिल जाता है।लेकिन इन गैरजिम्मेदारो को अपने दायित्वों के प्रति तनिक भी परवाह नहीं है।ड्यूटी की फार्मेल्टी बस निभाकर अपने कर्त्तव्य से इतिश्री करने में लगे है।ग्रामीणों ने बताया की शासकीय आयुर्वेद औषधालय दोपहर रोज 12 बजे बंद हो जाता है और ताला लगाने के इसके बाद दूसरा समय खुलता ही नही है।वही जो अधिकारी है वो केवल हफ्ते में एक दिन बस आते है।जबकि इस आयुर्वेद हॉस्पिटल के सामने सूचना बोर्ड में खुलने का समय सुबह 8 बजे से 1 बजे और 4 बजे से 5 बजे लिखा हुआ है।जो दोपहर के बाद कभी नही खुलता है। जो ऐसे कई सालो से चलते आ रहा है जंहा जिम्मेदारो द्वारा जानबूझकर कोताही बरती जा रही है।जिसके चलते आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।एक तरफ सरकार लोगो को बेहतर स्वास्थ सुविधा मुहैया कराने तरह तरह के प्रयास कर रही है लेकिन जिन लोगो को इसकी क्रियान्वयन के लिए अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है वही सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं और जनता के स्वास्थ के प्रति गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है।अब सवाल ये है की आखिर शासन इन अधिकारियों को अच्छी वेतन और सारी सुविधाए किस काम के लिए दे रही है।
शासन के आदेश को खुलेआम ठेंगा
गौरतलब है की 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के मैदानी कार्यालयों में पदस्थ राज्य के शासकीय कर्मचारियों को माह के दूसरे और तीसरे शनिवार के साथ पहले चौथे और पांचवे के छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बीते दिनों अधिसूचना जारी कर माह के प्रत्येक शनिवार को शासकीय कार्यालयों में अवकाश की घोषणा की गई थी इसके साथ ही आदेश में कार्यालयीन समय में संशोधन करते हुए शासकीय कार्यलयों में कार्य का समय 10:00 बजे से लेकर 5:30 बजे तक रखा गया है।
इसके पीछे शासन की मंशा रही है कि इससे कार्यक्षमता और उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी। लेकिन गरियाबंद जिले के अनेको शासकीय विभागों में जो तस्वीरें देखने को मिल रही है उससे तो साफ जाहिर होता है कि शासन द्वारा जारी आदेश को लेकर शासकीय कर्मचारियों में जितनी खुशी है वहीं अपने कर्त्तव्यो को लेकर वे जरा भी सजग नजर नहीं आ रहे हैं। जिले के अधिकतर शासकीय कार्यालयों की स्थिति इतनी चिंतनीय है।ऊपर से शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों की लेटलतीफी आमजन की तकलीफों में सोने का सुहागा का काम करती है। ऊपर से अधिकारियों और कर्मचारियों के डर से चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी जो समय पर ऑफिस पहुंच जा रहे हैं उन्हें भी झूठ कहना पड़ रहा है।गरियाबंद जिले के शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्राशाही इस कदर हावी है कि काम के लिए दूरदराज से आने वाले लोग सुबह से कार्यालयों में पहुंच जाते हैं।लेकिन मालिक की तरह आने वाले कर्मचारी और अधिकारियों की कुर्सी खाली ही नजर आती है इतना ही नहीं जब विभागीय अधिकारी समय पर नहीं पहुंचते तो वह अपने कर्मचारियों को कितना पाबंद कर सकते हैं यह सोचने वाली बात है। शासन के आदेश की मॉनिटरिंग करने के लिए भी बड़े अधिकारियों को खुद नियमित होना पड़ेगा।लेकिन यहां तो अधिकारी ही लेट लतीफ नजर आते हैं तो फिर कर्मचारियों से उम्मीद करना बेमानी सा प्रतीत हो रहा है।वही परसदाजोशी के आयुर्वेद औषधालय में लापरवाही का आलम इस कदर है की यंहा के अधिकारी कर्मचारी हमेशा गायब रहते है।जिससे ग्रामीण भी खासे नाराज है।वही मिली जानकारी के मुताबिक इस औषधालय में चिकित्सक का पद रिक्त है जिसके लिए शासन द्वारा बासिंग आयुर्वेद औषधालय में पदस्थ एक महिला अधिकारी को परसदाजोशी के लिए प्रभार दिया गया है लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक वो भी हफ्ते में एक दिन आती है।ये अधिकारी भी अपने कर्तव्यों का पूर्ण रूप से निर्वहन नही कर रही है।वही इस मामले को लेकर फार्मसिस्ट एल के वर्मा से जब फोन के माध्यम से जानकारी लिया गया तो उन्होंने खुदा स्वीकार किया की आयुर्वेद औषधालय दोपहर में बंद होने के बाद सेकंड टाइम नही खुलता।जब मीडिया ने इस बारे में सवाल किया तो ये जिम्मेदार अधिकारी गोल मोल जवाब देने लगा।वही अधिकारी भी फोन नंबर उनका पक्ष जानने फार्मसिस्ट से मांगा लेकिन उन्होंने ने नही दिया।जिसके कारण इस मामले में संबंधित अधिकारी से संपर्क नही हो पाया।
