कोई भी सांस आदमी की आखिरी सांस हो सकता है–ब्रम्हकुमारी


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प्रभु मिलन भवन ब्रह्मा कुमारिस पाटन में आज शिवरात्रि का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुवे शिवकुमारी दीदीजी ने कहा कि रात्रि माना अंधकार से नही बल्कि कलयुग की अज्ञान रूपी अंधकार से है। भगवान कोई साधारण आंखों से देखने की चीज नही है बल्कि उसे देखने के लिए ज्ञान का तीसरा नेत्र दिब्य चकछु की आवश्यकता है। यह पुरुषोत्तम संगमयुग है , इसी संगमयुग में भगवान परकाया प्रवेश कर सच्ची गीता ज्ञान देते हुवे हमे अज्ञानता दूर करते है।
आगे दीदी जी ने कहा कि यह समय बहुत ही नाजुक चल रहा है विश्व युद्ध हो रही है, कब किसकी आखरी घड़ी हो कुछ कहा नही जा सकता, समयानुसार प्राकृतिक आपदा भी आ ही रही है। अतः आप सभी से निवेदन की समय की नजाकत ओ पहचान कर इस विश्व नव निर्माण के पुनीत कार्य मे सहयोगी बने।।
शिवरात्रि में हम भोले बाबा में अक, धतूरा अन्य विषैले पदार्थ चढ़ाते है लेकिन इसका आध्यात्मिक अर्थ कुछ और ही है आज हम सभी परमात्मा को साथ रख सभी प्रतिज्ञा करे कि अपने अंदर की कोई न कोई एक अवगुन को शिवबाबा में अर्पण करें। निश्चित ही परमात्मा की मद्त मिलेगी और इसी मदद से जीवन को विकारो से मुक्त बनाया जा सकता है।।
प्रति वर्षानुसार आरक्छि केंद्र पाटन में शिव मंदिर में शिवधवजारोहन किया गया।।अंत मे शिवकुमारी दीदी ने सभी आत्माओ को शिवमहोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुवे कहा सभी खुशहाल ,सुख शांति से भरपूर रहे।। इस्की जानकारी विनय पटेल ने दी।

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