तेजी से विलुप्त हो रहे छत्तीसगढ के राजकीय पशु वन भैंसा श्यामु और जुगाडु के कंकाल को राजधानी के संग्रहालय में रखने की तैयारी

  • 2018 से दफन कंकाल को निकलने को पहुंचेगें विशेषज्ञों की टीम

✍🏻 रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

पूरे देश में तेजी से विलुप्त हो रहे वन भैंसा को छत्तीसगढ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ का राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है और वन भैंसा के संरक्षण और संवर्धन के लिए जंहा एक ओर वन विभाग एवं सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे है बावजूद इसके वन भैसों की संख्या बढने बजाय तेजी से घटा है पूरे देश में छत्तीसगढ के मैनपुर उदंती अभ्यारण में शुद्ध प्रजाति के वन भैंसा पाया जाता है लेकिन एक वर्ष पहले उदंती अभ्यारण्य में एक मात्र मादा वन भैंसा के मौत के बाद अब इस वन भैंसो के नस्ल बढाने की दिशा में वन विभाग और सरकार द्वारा चलाये जा रहे अभियान पर ब्रेक लग गया है , ज्ञात हो कि उदंती अभ्यारण में आज से कुछ वर्ष पहले तक बडी संख्या में राजकीय पशु वन भैंसा पाये जाते थे लेकिन धीरे धीरे इसकी संख्या ऐसे घटी की अब मात्र 07 नर वन भैंसा ही उदंती अभ्यारण में बचा हुआ है जिसमें से एक वन भैंसा प्रिंस के आंख में खराबी के चलते वह बिमार है तो खुले जंगल में एक भैंसा राजा घुम रहा है और उंदती अभ्यारण कक्ष क्रमांक 82 में वन विभाग द्वारा संरक्षण संर्वाधन केन्द्र बनाकर 30 हेक्टेयर जंगल बाडे के भीतर 5 वन भैंसा छोटू मोहन वीरा सोमू एवं हीरा को रखा गया है बाहरहाल वन भैसों की घटती संख्या के कारण राजकीय पशु संकट की स्थिति में आ गया है वहीं अब वन विभाग द्वारा वन भैंसा के कंकाल को संग्रहालय में रखने की तैयारी किया जा रहा है जिससे भविष्य में विलुप्त होते वन भैंसे के कंकाल को प्रदर्शनी म्यूजियम के माध्यम से देखा जा सके एक तरह से देखा जाये तो वन भैंसा के संरचना एवं उसके प्रकृति को लेकर इस कंकाल के जरिये भविष्य में रिसर्च एवं अध्ययन किया जायेगा इसके पिछे उदेश्य यह है कि आने वाली पीढ़ी को वन भैंसा के बारे में जानकारी देना, कोरोना काल के कारण पिछले वर्ष नही निकाला जा सका कंकाल मैनपुर उदंती अभ्यारण में श्यामू एवं जुगाडु नामक वन भैंसा के मौत के बाद वर्ष 2018 में इसे वैज्ञानिक तरिके से दफन किया गया है ताकि भविष्य में इसके कंकाल को निकाला जा सके विभागीय सूत्रो के अनुसार पिछले वर्ष इस कंकाल को निकलाना था लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण वन भैंसा के कंकाल को निकलने वाली विशषज्ञों का टीम नही पहुंच पाए

                                                                                                                                        

पूरे देश में पहली बार वन भैंसा के कंकाल को संग्रहालय में रखने की तैयारी
पूरे देश के भीतर यह पहला ममला है जब वन भैंसा के कंकाल को संग्रहालय में रखने की तैयारी किया जा रहा है श्यामू और जुगाडु वनभैंसा का कंकाल आम लोगो के देखने के लिए जिज्ञासा का केन्द्र बिन्दु रहेगा वैसे तो कहीं भी वन भैंसे के कंकाल म्यूजियम में कही भी नही रखे गये है गौरतलब है कि प्रदेश के एक मात्र गरियाबंद जिले के मैनपुर उदंती अभ्यारण में शुद्ध प्रजाति के वन भैंसा पाये जाते है जिनकी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है वहीं आने वाली पीढी को राजकीय पशु वन भैसें के कंकाल से उनके बारे में जानने और समझने में यह वन विभाग का प्रयास काफी सराहनीय भूमिका निभायेगी
क्या कहते है वन अफसर उदंतीसीता नदी टाईगर रिजर्व के उप निदेशक आयुष जैन ने बताया उदंती अभ्यारण में दफनाये गये वन भैंसा की कंकाल को सुरक्षित तरिके से सावधानी पूर्वक निकाला जायेगा और इसे संग्रहालय में रखा जायेगा यह शासन स्तर का मामला है कि उसे कौन सा संग्रहालय में रखेगें लेकिन इसके लिए अनुमति लिया जा चुका है और बजट की मांग किया गया है आने वाले दिनो में वन भैसों के कंकाल को निकाला जायेगा
आयुष जैन उपनिदेशक
उदंतीसीतानदी टाईगर रिजर्व
क्या कहते है डब्ल्यू टी आई नई दिल्ली के डॉक्टर
डब्ल्यू टी आई नई दिल्ली के डॉक्टर आर पी मिश्रा ने बताया पूरे देश में वन भैंसा के कंकाल को म्यूजियम में रखने का यह पहला अवसर होगा विशषज्ञो के माध्यम से इसे सुरक्षित निकाला जायेगा यह हमारे राज्य का राजकीय पशु है ताकि आने वाले भविष्य में हमारे अध्ययन करने वाले छात्रों और प्रदेश के लोगों वन भैंसा के बारे में और विस्तार से जानकारी मिल सके श्री मिश्रा ने बताया कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष विशेषज्ञों का टीम नही आ पाया इसके लिए ओंड़िसा एवं हरियाणा करनाल से टीम पहुंचेगी और वन भैंसा के कंकाल को निकाला जायेगा
डॉ आर पी मिश्रा
डब्ल्यू टी आई नई दिल्ली

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