भानपुर जहां की मिट्टी से रेबीज के कीटाणु का प्रभाव नहीं होता

धमधा से प्रदीप ताम्रकार की रिपोर्ट

धमधा। धरमधाम की नगरी धमधा से 3 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है भानपुर जहां की मान्यता है कि वहां बने एक चबूतरे की मिट्टी जिसमें अनार का पेड़ लगा हुआ है वहां कि मिट्टी के सेवन से कुत्ते के काटने से होने वाले रेबीज़ का प्रभाव समाप्त हो जाता है यहा छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन दूसरे प्रदेश से भी लोग आते हैं भानपुर के मिट्टी की मान्यता लगभग तब से मानी जा रही जब यहां गोंडवाना राज हुआ करता था उक्त स्थल के पास तालाब था जिससे निस्तारी होती थी वह तालाब अभी अवैध कब्जे की भेंट चढ़ गया है राजस्व का मामला बनता है कि उस स्थल को ठीक करें भानपुर में एक चौरा बना हुआ है इसमें अनार का पेड़ लगा हुआ है बताते हैं वह पेड़ कभी नहीं सूखता कुत्ते के काटने वाले व्यक्ति को सिर्फ नारियल और अगरबत्ती लेकर जाना पड़ता है वहां पूजा पाठ कर सात बार परिक्रमा किया जाता है साथ ही नारियल के रूप में प्रसाद के साथ वहां की मिट्टी का भी सेवन किया जाता है प्रक्रिया पूर्ण होती है नारियल के प्रसाद को घर नहीं लाया जाता उसे रास्ते में ही जो भी मिले उसे वितरण कर दिया जाता है धमधा पहुंचने पर बस स्टैंड से हटरी बाजार महामाया मंदिर होते हुए भानपुर पहुंचा जा सकता है वहां टार बांध के रास्ते को पार करते हुए लगभग किसानों के पांच से छह खेतों को पार कर पहुंचा जा सकता है भानपुर के किसान टीका राम साहू बताते हैं कि यहां प्रतिदिन कुत्ते के काटने वाले लोग आते हैं कई दिन तो यह संख्या 5 से 10 भी हो जाती है नगर के बुजुर्गों ने बताया कि भानपुर में सैकड़ों वर्ष पहले बस्ती हुआ करता था बस्ती के लोग धमधानगर में बस जाने के कारण भानपुर में कृषि कार्य अधिकता से हो रहा है नगर के वरिष्ठ नागरिक श्रवण कुमार गुप्ता कहते हैं कि हम भानपुर के महत्व को सैकड़ों साल पहले से जानते और मानते आ रहे हैं पहले जब रेबीज का इंजेक्शन की इजात नहीं हो पाया था तब लोग यहां आकर ही रेबीज से मुक्ति पाते थे मान्यता के अनुसार जानवरों को भी कुत्ता काटने के बाद भानपुर की मिट्टी खिलाते हैं अब रेबीज के इंजेक्शन तो आ गए हैं फिर भी लोग यहां पहुंचकर अपना कार्य करने से नहीं चूकते मान्यता को आज भी लोग मानते आ रहे हैं और यह मान्यता कभी समाप्त नहीं होगी और लोगों की आस्था बनी रहेगी यह तय है

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