परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद
गरियाबंद जिला के छुरा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर के आश्रित कमारटोला खदराही में हरे भरे पेड़ों की अवैध कटाई रुकने का नाम नहीं ले रहा है।अतिक्रमणकारियो द्वारा राजस्व की जंगल में खेत बनाने लगभग 15 एकड़ जमीन में स्थित हरे भरे हजारों पेड़ पौधों को काटकर मैदान में तब्दील कर दिया है।जिसकी जानकारी छुरा तहसीलदार को देने के बावजूद भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पर्यावरण के प्रति तनिक भी गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है।जिसके वजह से खबर प्रकाशन और जानकारी देने के बाद भी अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी निद्रा में है।वही कार्यवाही नही होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते जा रहा है और लगातार हरे भरे पेड़ों की लगातार कटाई कर घने जंगल को नेस्तनाबूत करने में लगे है।अगर इसी तरह कटाई होते रहा तो इस जंगल का एक बड़ा एरिया जल्द ही मैदानी एरिया में तब्दील होकर वीरान हो जायेगा।

आपको बता दे की कुछ माह पहले यह जगह घने बड़े बड़े हरे भरे पेड़ पौधों से भरा हुआ था।लेकिन अतिक्रमणकारियों की इस राजस्व की जंगल में इस तरह कुदृष्टि पड़ी की देखते ही देखते पूरे पेड़ पौधों को ही काट डाला।कुछ माह पहले जंहा हरे भरे पेड़ पौधे दिखाई पड़ते थे वंहा अब केवल वीरान और मैदान दिखाई दे रहा है।लेकिन जिन अधिकारियों को जंगल,पेड़ पौधों और जमीन को सहजने और सुरक्षित रखने की अहम जिम्मेदारी दी गई है वही अपने कर्तव्यों से इतीश्री करने में लगा है।जिससे तो अब यही लगता है की पर्यावरण बचाना अब इन अधिकारियों की बस की बात नही ,पेड़ पौधों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे ही है।क्योंकि जिम्मेदारों को एसी रूम और गद्देदार कुर्सी छोड़कर बाहर झांकने तक की फुर्सत नही है।वही इस एरिया में वन विभाग का मुनारा भी बना हुआ है।जिसके अंदर के एरिया में अतिक्रमण जारी है।जिसको लेकर जब फुलझर बीट के बिट गार्ड राहुल श्रीवास से पूछा गया तो उन्होंने कहा की जिस जगह अतिक्रमण हो रहा है वो राजस्व की जमीन है। बहुत पहले वन समिति द्वारा जंगल अतिक्रमण न हो ये सोचकर मुनारा जंगल की जमीन से दूर में स्थापित कर दिए थे।लेकिन वनकर्मी का जवाब भी लोगो के गले नही उतर रहा है।आखिर वन विभाग अपने जमीन से 100 मीटर की दूरी पर मुनारा का निर्माण क्यों किए है।जो एक सवाल बन गया है।अब देखना होगा की कौन से विभाग अपनी जिम्मेदारियों का पहले निर्वहन करेंगे या फिर इस मामले को अनदेखा कर देंगे।
