कोरोना काल मे बैगन की खेती बना आय का साधन

छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग जिला मे जहां धान के खेती के अलावा सब्जी की खेती भी की जाती है, दुर्ग जिला को उद्यानिकी का गढ़ भी कहा जाता है, यहाँ विभिन्न प्रकार के सब्जियाँ उगाई जाती है।

यहाँ के किसान मुखयतः खेती पर निर्भर रहते है मुख्य रूप से यहाँ पर धान और सब्जी की खेती की जाती है यहाँ पर दोमट और काली मिट्टी पायी जाती है जो खेती के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। किसान के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण मुखयतः खरीफ के ही खेती कर पाते है खरीफ मे मुखयतः धान और सब्जी की फसल ली जाती है और जिन किसानो के पास सिंचाई की व्यवस्था होती है वे किसान रबी मे सब्जी, गेहूं और चना इत्यादि की भी खेती करते है।

ढाल सिंह साहू नाम का किसान जो घुघुवा गाँव मे रहता है जिनकी उम्र 39 वर्ष है। किसान स्टेस्नरी की दुकान और खेती पर निर्भर है तथा खेती किसानी कर के अपने परिवार का पालन पौषण करते है। ढालसिंह की पढ़ाई 12वी तक ही हुयी, परिवार की जिमेदारी मिलने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाये और दुकान और किसानी करना शुरू कर दिये। किसान के परिवार मे माता, पिता, पत्नी, 2 बच्चे और स्वय रहते है, ढाल सिंह के पास 4.10 एकड़ जमीन है जिसमे वो पारंपरिक रूप से खेती करते है, जिससे लागत के साथ अच्छी उपज भी प्राप्त नहीं होती थी।

रबी मौसम मे किसान ने 20 डिसमिल मे बैगन की फसल लगाई उस समय कोरोना का समय चल रहा था किसान को जानकारी इकट्ठा करने मे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा, किसान को रिलायंस फ़ाउंडेशन की निशुल्क टोल फ्री नंबर की जानकारी प्राप्त हुई। किसान ने 6 अप्रैल को टोल फ्री मे कॉल किया और जानकारी ली की बैगन के पत्ते मे धब्बे लग रहे है और फल भी नहीं आ रहे है, एजेंट ने किसान की पूरी जानकारी ली और प्रश्न को समझ कर उनके कॉल को विशेषज्ञ के पास ट्रान्सफर किए। विशेषज्ञ ने किसान की पूरी समस्या को सुनने के बाद किसान को सलाह दी की बैगन के पत्ते मे धब्बे दिख रहे है उसके लिए मेंकोजेब का 3 ग्राम प्रति लिटर के हिसाब से स्प्रे करे, और फूल नहीं लग रहे है उनके लिए आप एनपीके और पीजीआर (मिरकुलान) का स्प्रे करे।

किसान ने दूसरे दिन द्वा लाकर इसका स्प्रे किया और किसान को काफी हद तक फायेदा मिला पत्ते मे हो रहे धब्बे भी साफ हो गया और धीरे धीरे फूल आने लगे और फूल से फल लगने लगे।

उपरोक्त बताए जानकारी अनुसार किसान ने अपने खेत मे प्रयोग किया और 20 डिसमिल से 26 कुंटल बैगन का उत्पादन लिया व 7 से 8 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा और 11000 रुपए बोवाई से लेकर कटाई तक खर्चा आया साथ ही सभी खर्चे को कट कर 9800 शुद्ध मुनाफा प्राप्त किया।

ढालसिंह ने कहा की “बैगन की खेती मे मुझे मुनाफा हुआ, इसके फायदे से प्राप्त पैसे को मैंने अपने बच्चे के पढ़ाई मे लगाया और बच्चे को आत्मानन्द स्कूल मे दाखिला कराया और साथ ही रिलायंस फ़ाउंडेशन को धन्यवाद व्यक्त किया।”

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