खनिज व राजस्व अधिकारियों के उदासीनता से लाल ईट संचालक हो रहे हैं मालामाल…मध्यप्रदेश के ठेकेदारों के कबीरधाम में जलवा

भुवन पटेल@कवर्धा। खनिज माफियाओं पर कड़ी कार्यवाही करने का फरमान प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा जारी किया गया हैं जिसको लेकर कवर्धा में खनिज विभाग के अमला यदाकदा गरीब लोगों के ऊपर कार्यवाही कर अपना जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं जबकि अन्य राज्यों से ईंट बनवाकर यहां व्यवसाय कर रहे लोगो के ऊपर कार्यवाही करने में उनका हाथ -पांव कांप रहे हैं शायद मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का फरमान इनके ऊपर लागू नही होता या उनलोगों के द्वारा अधिकारियों के ओहदे के अनुसार चढ़वा मिल गया होगा ।

कोटवारी ज़मीन पर ईट व्यवसाय

पंडरिया विकाशखण्ड के ग्राम पडकीकला में कोटवार को जीवनयापन के लिए शासन द्वारा आबंटित जमीन पर बड़े मात्रा में ईंट का कारोबार विगत कुछ वर्षों से किया जा रहा है । इसपर कोई कार्यवाही नही हो रहा है । लोगो का मानना है कि कोटवारों का सीधा संपर्क राजस्व विभाग सहित अन्य सरकारी दफ्तरों में रहता है जिसके चलते उनको संरक्षण प्राप्त हो रहा है ।

अन्य राज्य के ठेकेदार द्वारा ईट का व्यापार

पडकीकला के कोटवारी जमीन पर पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के कुम्हार के द्वारा बड़े पैमाना पर किया जा रहा है और लोगो को महंगे दामो पर बेचा जा रहा है वही इतने बड़े रूप व्यवसाय हो रहा है जिसका भनक संबंधित अधिकारियों को नही लग रहा है मतलब कोई कार्यवाही नही होना अधिकारियों के दायित्वों के निर्वहन और खानापूर्ति के कई अर्थ लोगो के द्वारा निकाला जा रहा है जो चर्चा का विषय बना हुआ है ।

भु राजस्व सहिंता के नियमो का उल्लंघन

भु राजस्व सहिता के नियमो में लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के कुम्हार जाति के लोगो को जीवनयापन के लिए ईट बनाने में कुछ छूट दिया गया है लेकिन अन्य राज्यो के लोग इसनियम क़ानून का हवाला देते हुए अधिकारी संरक्षण में अपना कारोबार बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से कर रहे हैं । पडकीकला संचालित अवैध ईट भठ्ठा के संचालक के द्वारा कोटवारी जमीन पर व्यवसाय करने के लिए स्थानीय ग्राम पंचायत से पंचायत प्रस्ताव भी नही कराया है और लोगो को धमकाया जाता है कि हम कुम्हार जाति के है और शासन से हमे ईट बनाने के लिए छूट है । ग्राम और पंचायत पदाधिकारियों को नियमो का ज्ञान नही होने का बेजा फायदा उठा जिम्मेदार अधिकारी के संरक्षण में विगत कुछ वर्षों से उठा रहा है ।

बाल श्रमिकों से लिया जाता है कार्य

प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के उम्र में वहां पर ईट बनाने वाले श्रमिको के बच्चे भी अपने गरीब माता-पिता के कार्यो में सहयोग करते हैं । पढ़ाई लिखाई के उम्र में मजदूरी करते हैं । इनपर न तो श्रम विभाग ने कार्यवाही किया है न ही बाल संरक्षण समिति के द्वारा । जबकि प्रत्येक ग्राम पंचायत , जनपद पंचायत व जिला स्तरीय बाल कल्याण समिति का गठन हुआ है लेकिन यह समिति भी फाइलों में दफन हो रहा है । कौन इसका अध्यक्ष, सचिव व सदस्य हैं साथ ही उनको क्या अधिकार प्राप्त है ये भी पता नही ।

पर्यावरण को नुकसान

पडकीकला के कोटवार के जमीन पर अवैध रूप से संचालित ईट भठ्ठे में ईट पकाने के लिए स्थानीय स्तर पर हरे भरे पड़े की कटाई तो करते ही है वही बिना रॉयल्टी के कोयला का भी उपयोग किया जाता है जिसके चलते पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है ।

लाखो की संख्या में ईंट मौजूद

पडकीकला में मध्यप्रदेश के ठेकेदार के द्वारा संचालित ईट भठ्ठा में लाखों की संख्या में ईंट मौजूद हैं । लगभग चार-पांच एकड़ में यह कार्य विगत कई वर्षी से किया जा रहा है । उक्त स्थल पर जाकर देखने से लगता है कि यहाँ पर कोई चिमनी भठ्ठा संचालित हो रहा है लेकिन ऐसा नही है ।

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