उतई । छग शासन की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का तृतीय चरण का संचालन अक्टूबर 2021 से एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग ग्रामीण में किया जा रहा है । इसके तहत सभी मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चो को चिन्हांकित कर आगामी 6 माह में अधिकतम बच्चो को सुपोषित करने के लिए प्रभावी गृहभेट और पोषण व्यवहार परिवर्तन पर अधिक जोर दिया जा रहा है क्योंकि अधिकांशतः 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चे ही कुपोषण का शिकार होते है जबकि इनका पूरा समय घर पर ही व्यतीत होता है और देखभाल की जिम्मेदारी परिवार की ही होती है ,पर जानकारी के अभाव में बच्चो की सही देखभाल नही कर पाते है और बच्चा धीरे धीरे कुपोषण का शिकार होता चला जाता है । अजय कुमार साहू बाल विकास परियोजना अधिकारी दुर्ग ग्रामीण ने बताया कि जब तक कुपोषित बच्चो के माता- पिता या परिवार के लोगो का पोषण के प्रति व्यवहार परिवर्तन नही होगा तब तक इस कुपोषण की जंग से पार पाना संभव नही है । परियोजना अधिकारी द्वारा सभी सेक्टर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ की बैठक लेकर मुख्य रूप से प्रभावी गृहभेट कर सभी कुपोषित बच्चो के घरों में रेडी टू इट खाद्य सामग्री की निर्धारित मात्रा बच्चे रोज सेवन कर सके, इसके लिए रेडी टू ईट के साथ फूटा चना, तिल, गुड़, तेल , मीठी नीम पत्ती और मुनगा भाजी की कच्ची पत्तियां को मिलाकर इन बच्चो के लिए पौष्टिक लड्डू बनवाया जा रहा है और रोज़ इन्हे घर के खाने के अलावा खिलाया जा रहा है। कुपोषण के शिकार हुए बच्चो की खाने के प्रति रुचि नही होती है माता पिता से उनकी रुचि को पता कर उन्ही खाद्य सामग्री को पोषण युक्त तैयार करने के लिए परिवार को प्रेरित किया जा रहा है। अभी ठंड के मौसम में बच्चे बहुत जल्दी बीमार व सर्दी खांसी से प्रभावित हो जाते है सर्दी खांसी से बचाने के लिए गर्म कपड़े , रात को सोते समय मोजा और स्वेटर पहनाने की सलाह दिया जा रहा है साथ ही जायफल को शहद के साथ सुबह शाम दिए जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है जिससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो पाए । बच्चो को मौसम के अनुसार सुरक्षित रखने की सलाह बार बार गृहभेट के दौरान दी जा रही है। इस अभियान के सफ़ल क्रियान्वयन के लिए सोनल सोनी पर्यवेक्षक
सेक्टर हनोदा द्वारा भी कुपोषित बच्चों के घरों में प्रभावी गृहभेट किया जा रहा है परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षक द्वारा संयुक्त गृहभेट कर ग्राम पूरई की कुपोषित बच्ची रीतू जिसका वजन पिछले 2 माह से बढ़ नहीं रहा था, बच्ची को बार बार सर्दी जुकाम और बुखार की शिकायत होने तथा घर वालो द्वारा बिस्किट और बाहर की चीजें खिलाए जाने से बच्ची का वजन अच्छे से बढ़ नहीं पा रहा था ।गृहभेट के दौरान खानपान की सही आदतों को अपनाना क्यों जरूरी है ? साथ ही मौसम अनुरूप बच्चे की देखभाल करना क्यों जरूरी है ? इन सभी बातों का ध्यान माता को दिलाए जाने से अब बच्चे को बाहर की चीज़ नहीं दिया जा रहा है और रोज़ बच्ची को सुबह नाश्ते में रेडी टू ईट का पौष्टिक लड्डू खिलाया जा रहा है।साथ बच्ची के लिए जनसहयोग से दूध भी उपलब्ध कराया जा रहा है इस प्रकार कार्यकर्ता द्वारा नियमित रूप से इसकी मोनिटरिंग और देखभाल की जा रही है । परियोजना अंतर्गत सभी कार्यकर्ता व्यवहार परिवर्तन को लेकर प्रभावी गृहभेट कर रही है । जिसका परिणाम दिखने भी लगा है ।
कुपोषित बच्चों के घरों में प्रभावी गृहभेट से ही व्यवहार परिवर्तन संभव
