कुरूद. कथा व्यास राजन महाराज ने कहा कि भरत चरित्र सदैव अनुकरणीय रहेगा। उनका संकल्प-समर्पण और त्याग अलौकिक रहा। भरत जी का जीवन दर्शन प्रासंगिक बना जाता है। भाई श्रीराम की कृपा और प्रेम पाने के लिए उन्होंने बिना क्षण भर की देरी किए अयोध्या का सारा वैभव ठुकरा दिया। वे गाड़ाडीह में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बदलते युग में ऐसा लग रहा है कि जल्दी ही संयुक्त परिवार कहानी बन जाएंगे। आज परिवार की नई परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं। इस पर पश्चिमी देशों की भौतिकतावाद का पूरा असर है। लेकिन जीवन मूल्य क्षीण हो रहे हैं। भौतिक उपलब्धियों के बाद भी लोग बेचैन हैं। सुख-शांति की तलाश में जहां-तहां भटक रहे हैं। जबकि वैदिक व्यवस्था में मानवता सर्वोपरि थी। व्यक्ति खुद से पहले अपने पड़ोसियों की चिंता करता था।
चित्रकूट प्रस्थान प्रसंग सुनाया : कथा व्यास राजन महराज ने गंगा तट श्रृंगवेेरपुर, प्रयागराज पहुंचने, ऋषि भारद्वाज व महर्षि वाल्मीकि के दर्शन करने और चित्रकूट प्रस्थान तक के प्रसंगों की कथा को संगीतमय विस्तार दिया। कहा कि अत्री ऋषि और उनकी प|ी अनुसुइया की तप स्थली चित्रकूट में मंदाकिनी गंगा के किनारे वनवास के 12 वर्ष व्यतीत किए।
19 को शबरी प्रेम एवं अंतिम दिवस 20 मार्च को सुंदरकांड एवं श्रीराम राज्य अभिषेक कथा प्रसंग का रसपान कराया जाएगा। कथा रोज दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक हो रही है।
