रोशन सिंह @उतई।पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी सोमवार को प्रदेशभर में छेरछेरा मनाया जाएगा। उतई नगर में छोटे छोटे बच्चो ने घर घर जाकर अन्नदान मांगी।दान को समर्पित इस लोकपर्व की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें अमीरी-गरीबी का कोई भेद नहीं है। याचक किसी भी दरवाजे पर दस्तक दे, वहां से खाली हाथ नहीं लौटता। हर व्यक्ति अपनी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार उन्हें कुछ न कुछ देकर ही विदा करता है। दान की इस संस्कृति का हमारे समाजों पर भी गहरा प्रभाव दिखता है। यही वजह है कि छेरछेरा भले एक दिन पड़ता हो लेकिन इसे मनाने की मूल भावना सालभर जिंदा रहती है।
उतई नगर में रही छेर-छेरा का पर्व की धूम
