मैनपुर क्षेत्र के ग्राम सोरनामाल के ग्रामीण सरकार की योजनाओं से वंचित शासन-प्रशासन मौन जिम्मेदार कौन

✍🏻 रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद

गरियाबंद। एक तरफ शासन ने शिक्षा का अधिकारी कानून बनाकर सभी बच्चो को शिक्षा दिलाने तरह तरह के प्रयास कर रहे है और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे इसके लिए लाखो करोड़ो रूपये का बजट खर्च किया जा रहा है और ठीक इसके विपरित गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र मे शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति किसी से छिपा नही है यहां आदिवासी बच्चे जो स्वयं स्कूल पहुंचकर शिक्षा ग्रहण करना चाह रहे है उन्हे भी शिक्षा विभाग शिक्षा उपलब्ध कराने मे असमर्थ नजर आ रहे है। एक तरह से शिक्षा के क्षेत्र मे विकास के तमाम बड़े -बड़े दावे सिर्फ बड़े शहरो तक सिमटकर रह गई है और ग्रामीण दुरस्थ वनांचल मे आदिवासी बच्चो को पढ़ाई करने के लिए न तो स्कूल नसीब हो रहा है और न ही भवन। ऐसा ही एक मामला गरियाबंद जिले के तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 38 किलोमीटर दुर ग्राम सोरनामाल मे देखने को मिला यहां के आदिवासी ग्रामीण पिछले 10 वर्षो से स्कूल खोलने एवं भवन निर्माण की मांग को लेकर विधायक, सांसद और तो और राज्य सरकार से मांग करते थक चुके अब तक कोई ध्यान नही देने के कारण ग्राम सोरनामाल के ग्रामीणो ने बैठक कर अपने बच्चो के भविष्य को देखते हुए धान, चांवल एवं 50 -50 रूपये चंदा के रूप मे कुछ राशि एकत्र कर स्वयं श्रमदान कर एक कमरे का मिट्टी का स्कूल भवन का निर्माण किया है और बकायदा ग्रामीणो द्वारा बनाये गये मिट्टी के स्कूल भवन का पूजा अर्चना कर यहां स्कूल संचालित किया जा रहा है। महज 8 फुट लंबा 8 फुट चौड़ा एक कमरे मे कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक पांच कक्षाएं संचालित किया जा रहा है ग्रामीणो ने अपने बच्चो के भविष्य को देखते हुए स्वयं चंदा कर जो स्कूल भवन का निर्माण किया है इसका क्षेत्र के लोगो ने सराहना किया है।
सोरनामाल प्राथमिक शाला मे 30 छात्र -छात्राएं अध्यनरत है
ग्राम सोरनामाल के ग्रामीण डोमारसिंग, मनीराम, टंकधर, केशबोराम, रूपधर, खिरसिंदुर, प्रेमसिंग, माधवराम ने प्रेस वार्तालाप पर news24 carate.com संवाददाता को बताया इस गांव मे प्राथमिक शाला नही है और यहां से 08 किमी दुर कोयबा तथा खासरपानी मे प्राथमिक शाला संचालित हो रही है 08 किमी दुर जंगल रास्ता से कैसे बच्चे पढ़ाई करने कोयबा और खासरपानी जायेंगे कई बार विधायक, सांसद और राज्य सरकार से मांग कर थक चुके लेकिन अब तक कोई ध्यान नही दिया। पहले यह स्कूल घांसफुंस की झोपड़ी मे संचालित हो रहा था ग्रामीणो ने प्रेस वार्तालाप पर बताया चांवल, धान और 50 -50 रूपये चंदा एकत्र कर एक मिट्टी के कमरा का निर्माण किये है जहां कक्षा पहली से पांचवी तक की पढ़ाई किया जा रहा है और वर्तमान मे इस प्राथमिक शाला मे 30 छात्र -छात्राएं अध्यनरत है। पहली कक्षा मे 07, दुसरी कक्षा मे 08, तीसरी कक्षा मे 05, चौथी कक्षा मे 06 और पांचवी कक्षा मे 04 छात्र -छात्राएं है और ग्रामीणो के द्वारा चंदा कर स्कूल मे शिक्षक की भी व्यवस्था किये है लेकिन यहां के बच्चो को शासन द्वारा पुस्तक गणवेश व अन्य सुविधाएं नही मिल रही है।

क्या कहते है विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी

मैनपुर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी आर आर सिंग ने प्रेस वार्तालाप पर news24carate.com संवाददाता को बताया ग्राम सोरनामाल जो ग्राम पंचायत कोयबा के आश्रित ग्राम है यहां ग्रामीणो ने चंदा कर एक स्कूल भवन का निर्माण किया है और स्कूल का संचालन कर रहे है यह स्कूल सरकारी रिकाॅर्ड मे नही है लेकिन इस स्कूल के बच्चो को खासरपानी स्कूल मे नाम जोड़कर मध्यान भोजन उपलब्ध कराई जा रही है। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी श्री सिंग ने आगे यह भी बताया ग्राम सोरनामाल मे प्राथमिक शाला स्कूल प्रारंभ करने कई बार उच्च अधिकारियो को पत्र भेजा जा चुका है और यहां के 30 बच्चो को 08 किमी घने जंगल को पारकर खासरपानी प्रतिदिन पढ़ाई करने जाना संभव ही नही है। उन्होने आगे बताया जनपद के सामान्य सभा की बैठक मे भी सोरनामाल मे स्कूल खोलने भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।

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