✍🏻 रिपोर्टर विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद
गरियाबंद :- वैसे तो गरियाबंद जिला पूरे छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सुंदरता के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है
जिला में स्थित राजिम त्रिवेणी संगम , राजीव लोचन कुलेश्वर धाम , जतमई घटारानी , देवधारा , भूतेश्वर महादेव , कुकदा पिक , सिकासेर , पैरी उद्गम भाटीगढ़ ,
उदंती अभ्यारण , गोडेनाफाल ,
कदलिझरन , असुरहाड़ा जलप्रपात ,पूंजीपखान ,
देवभोग जगन्नाथ मंदिर ,ऋषिझरण ,
माँ गरजाई मंदिर
,रमई पाठ मंदिर , कचना धुर्वा मंदिर , निराई माता मंदिर के दर्शन के लिए पूरे प्रदेश से लोग गरियाबंद पहुचते है इसके अलावा राज्य के बाहर के सैलानी भी यहां आते है
यह स्थाल धार्मिक के साथ साथ पारिवारिक वातावरण में मनोरंजन घूमने फिरने , पिकनिक , के लिए बहुत खास है ,,,
इन प्रत्येक जगह के साथ अपनी एक अगल अगल मान्यता भी जुड़ी हुई है ,,
इसके अलावा यहां का पहुच मार्ग घने जंगल , पहाड़ के बीच से गूँजता हुआ प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ होने के कारण सैलानियों को खूब भाता है
आज हम एक खास जगह के बारे में आपको बताने जा रहे है जिसके बारे में शायद अब तक आप जानते ही नही होंगे ,,,?
जी हां यह खास जगह गरियाबंद जिला मुख्यालय से सिर्फ 18 किलोमीटर की दूरी पर हसोदा गांव के समीप स्थित है
इस जगह बहुत आसानी से सभी गाड़ियों से पहुचा जा सकता है यहां पहुचने के दो मार्ग है
पहला गरियाबंद पारागांव से भूतेश्वर महादेव के दर्शन करते हुए बेंकुरा के बाद हसोदा ,,, दूसरा रास्ता जोबा से उरतुली मोहलाई होते हुए हसोदा
यह स्थल प्रकृति का एक खूबसूरत नजारा होने के साथ ,,, मनमोहक और आस्था का स्थल भी है
कुदरत के इस खूबसूरत नजारे को देखते ही आपका मन खिल उठेगा हम बात कर रहे है हसोद गांव से लगे ,, प्राकृतिक स्थल रानी दाहरा की ,,, सोंढुरनदी का खल खल बहता जल और गुलाबी चट्टानों से घिरा नदी का माध्य भाग खूबसूरती एक शानदार नजारा है ,,
यहाँ के गुलाबी चट्टान अपने आप मे बहुत खास और अलग है
बहते जल की धारा और चट्टान पर जब सूर्य की किरण पड़ती है यहां पूरा दृश्य गुलाबी गुलाबी सा नजर आता है
इस जगह की अपनी एक अनोखी मान्यता भी है इतना खूबसूरत और खास जगह होने के बाद भी
प्रचार प्रसार के अभाव में इस जगह के बारे में बहुत कम लोग ही जानते है ,,,?
हमारा दावा है कि इस जगह की अतिसुंदर नजारे को देखने वाले का मन प्रफुल्लित हो जाएगा।
जो भी यहां आएगा इस मनोरम दृश्य को देखने के बाद बार बार आना चाहेंगे ,,, इस स्थल परिवार के साथ पिकनिक के लिये उत्तम जगह है
रानीदाहरा के बारे में ग्रामीण बताते है कि ,,, इस जगह का नाम
रानी के नाम पर पड़ा है
आस पास के क्षेत्र वासियों का मानना है कि बहुत समय पूर्व यहां रानी और राजा नहाने आते थे ,, जिसका कुछ प्रमाण ग्रामीणों के कहे अनुसार आज भी यह मौजूद है ,,,
राजा रानी का मंदिर अब चट्टानो के बीच दबा हुआ है जिसे आसानी से देखा नहीं जा सकता पर वर्षों बीतने के बाद भी अब तक लोगो की आस्था यहां से जुड़ी हुई है ,, इन कहावत के पीछे कितनी हकीकत और कितना फसाना है ये तो हम स्पष्ट नही कर सकते पर ये दावा जरूर करते है
कुदरत के इस अद्भुत खूबसूरत स्थल को देखकर आप पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो जाएंगे और बार-बार आपको यहां आने का दिल करेगा
