छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया के क्षेत्र में ही नगर पालिका परिषद आरंग के एक पीड़ित न्याय के लिए लगा रहा है 5 महीनों से दफ्तरों के चक्कर

  • मंत्री से लेकर संतरी तक शिकायत पर पीड़ित को नही मिला न्याय,न्याय न मिलने से दर- दर भटकने को हो रहे है मजबूर

परमेश्वर कुमार साहू,रायपुर

एक तरफ शासन आम नागरिकों की समस्याओं और आवेदनों को त्वरित निराकरण के लिए समय समय पर अपने अफसरों को दिशा दिशा निर्देश देने के साथ-साथ हर संभव प्रयास कर रही हैं ।ताकि आम नागरिकों को कोई समस्याओं का सामना न करना पड़े।लेकिन शासन के नुमाइंदों में अफसरशाही इतनी है कि इन्हें शासन के कार्यों और अपने दायित्वों सहित आम जनता की समस्याओं से इन्हें कोई सरोकार नहीं है। जिसका ताजा उदाहरण नगर पालिका परिषद आरंग में देखने को मिला जहां पीड़ित अपनी फरियाद लेकर न्याय के लिए लगभग 5 महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन किसी ने भी इनकी आवेदनों और समस्याओं का निराकरण करने का ना तो कोई पहल किया और ना ही कोई जांच कार्रवाई की गई।जबकि किसी भी आवेदन को निर्धारित समय सीमा में निराकरण करने का प्रावधान है।लेकिन नगर पालिका परिषद आरंग सहित यहा के जिम्मेदार अधिकारी नियमो की अनदेखी कर रहे है। जिम्मेदारों द्वारा पीड़ित के आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया है ।जिससे नगर पालिका के अधिकारियों,कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है।

आइए जानते है क्या है पूरा मामला

नगर पालिका परिषद आरंग के वार्ड नंबर 10 ब्राह्मण पारा निवासी उत्तम कुमार शुक्ला पिता रामगुलाल शुक्ला द्वारा नगर पालिका तहसीलदार,एसडीएम, नगरपालिका अध्यक्ष को लिखित आवेदन के माध्यम से अवगत कराकर अपनी समस्याओ को बताया था और न्याय की मांग किए थे।उन्होंने अपने लिखित आवेदन में बताया है की 6-7 पीढ़ी से ब्राह्मण पारा, वार्ड क्रमांक 10, गौरागुडी मंदिर के पास अपने पत्नी गौरी शुक्ला के साथ सपरिवार निवासरत है।जो की उनके मकान के मुख्य द्वार के सामने गौतम सेन पिता पुरषोत्तम सेन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण कर रहा है।जिसे नगरपालिका आरंग के इंजीनियर द्वारा गलत जानकारी और निर्देश के आधार पर अपने आने जाने के रास्ते और घर के सामने नगर पालिका द्वारा निर्मित नाली को बंद कर आवागमन अवरुद्ध करने का आरोप पीड़ित द्वारा लगाया है।पीड़ित उत्तम कुमार शुक्ला का कहना है की अपने मकान के चौखट से अंदर का भाग 5 फिट और सामने का भाग 3 फिट चौड़ा है जो पूर्णतः टेढ़ा है।जबकि सामने का भाग भी 5 फिट होना चाहिए।
गौतम सेन को अपने मकान का निर्माण 5 फिट आवागमन का रास्ता छोड़कर किया जाना चाहिए था।उन्होंने नगर पालिका के इंजीनियर पोषण साहू पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अत्यधिक जगह को घेरकर अपने आने जाने के रास्ते को अवरुद्ध कर गौतम सेन द्वारा भवन निर्माण किया जाने का उल्लेख अपने लिखित आवेदन में किया है।वही गौतम सेन ने अपने घर के आने जाने के रास्ते को छोड़कर आवागमन रास्ते को अवरुद्ध न करते हुए भवन निर्माण की सलाह गौतम सेन को पीड़ित द्वारा दिया गया था।लेकिन गौतम सेन शराब के नशे में आकर अपने परिवार के बाकी सदस्यों के साथ पीड़ित के पत्नी को मारपीट और जान से मारने की धमकी दिए जाने की भी शिकायत पीड़ित द्वारा किए जाने के बावजूद न तो पुलिस प्रशासन द्वारा कोई शिकायत लिखी गई और न ही कोई कार्यवाही की गई।जिसको लेकर पीड़ित उत्तम कुमार शुक्ला ने इसकी शिकायत जिला कलेक्टर रायपुर से भी किया।उसके बावजूद भी आज न तो कोई जांच हुई और न ही कोई कार्यवाही।इस पूरे मामले में नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियर पर पीड़ित ने आरोप लगाया है की इंजीनियर पोषण साहू ने जानबूझकर दुर्भावनावश मेरे आने जाने के रास्ते में अतिक्रमण करवाया और सेन परिवार को सहयोग कर रहा है।इस मामले की सच्चाई जानने हमारे संवाददाता ने आरंग पहुंच ग्राउंड जीरो पर जाकर पड़ताल किया।जन्हा पीड़ित उत्तम कुमार शुक्ला के निवास तक जाने का रास्ता संकरा हो चुका है महज 35 इंच का संकरा रास्ता है।जिसमे नगर पालिका द्वारा पानी निकासी के लिए नाली भी बना है।ऐसे जो वास्तविकता हमारे पड़ताल में दिखाई दिया उससे तो पीड़ित का मांग जायज है।क्योंकि भविष्य में निस्तारी और उसके आवागमन के लिए मार्ग होना जरूरी है।जो उसका अधिकार भी है।फिर भी जिम्मेदार इनके अधिकारों को दिलाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे है।

मंत्री से लेकर संतरी तक शिकायत,पर पीड़ित को नही मिला न्याय

छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया के क्षेत्र में ही नगर पालिका परिषद आरंग के एक पीड़ित न्याय के लिए गुहार लगा लगाकर थका चुका है और 5 महीनो से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।पीड़ित उत्तम कुमार शुक्ला द्वारा 13 सितंबर 2021 को नगर पालिका अधिकारी आरंग को पुरसोत्तम सेन व उनके पुत्रों के लिए कार्यवाही की मांग व भवन निर्माण में रोक लगाने के लिए आवेदन किया था।जब नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी ने नही सुनी तो पालिका अध्यक्ष आरंग, तहसीलदार आरंग, एसडीएम आरंग और थाना आरंग सहित कलेक्टर रायपुर को भी लिखित शिकायत किया गया।पर लगभग 5 माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित के आवेदन पर जानबूझकर ध्यान नहीं दिया गया और मामले को दबाने हर संभव प्रयास किया गया।वही छत्तीसगढ सरकार के कद्दावर नेता व नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया को भी न्याय के लिए पीड़ित ने आवेदन लगाया।लेकिन उन्होंने भी इस मामले की ओर ध्यान नहीं दिया।जबकि मंत्री जी के क्षेत्र में स्वन्म उनके विभाग में ही इस तरह किसी पीड़ित को न्याय नहीं मिल रहा हो और वह दर दर भटकने को मजबूर हो तो इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की पूरे छत्तीसगढ में संबंधित विभाग में ऐसी कई अव्यवस्थाए होंगी और कई ऐसे पीड़ित होंगे जो न्याय की मांग कर रहे होंगे।लेकिन मंत्री जी को इस ओर ध्यान नहीं है।जो दिया तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ होता है। इस प्रकार दबंग सेन परिवार के द्वारा पीड़ित उत्तम कुमार शुक्ला के आवागमन के एक मात्र मार्ग को अतिक्रमण कर देने से पीड़ित मानसिक रूप से व्यथित है और उसे आने जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।क्योंकि पीड़ित अपने सायकल,दोपहिया वाहन को भी अपने घर तक नही ले जा पाता।उसे अपने दोपहिया वाहन को दूसरो के घर रखना पड़ता है।साथ ही पीड़ित किसान एवम पशुपालक भी है ,घर पर पांच मवेशी पाल रखे है उसे भी आने जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।इस प्रकार इंसान तो इंसान ,जानवरो पर भी जिम्मेदारों को तरस नहीं आ रहा है।थक हार कर न्याय की आस में बैठे पीड़ित को आखिर अब कौन न्याय दिला पाएगा।क्योंकि जिन जिम्मेदारों के ऊपर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है वह तो अपने हाथ खड़े कर दिए है। ऐसे में गरीबों के हक एवं न्याय के लिए बड़ी बड़ी बात करने वाले छत्तीसगढ़ सरकार एवं उनके नुमाइंदों पर आम जनता का मोह भंग हो रहा है और भरोसा उठ रहा है।इस पूरे मामले में नगर पालिका के सभी जिम्मेदार सवालों के घेरे में है।वही इस मामले को लेकर नगर पालिका सीएमओ सौरभ शर्मा और इंजीनियर पोषण साहू को उनका पक्ष जानने लगातार चार -चार बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इस पूरे मामले पर नगर पालिका आरंग के अध्यक्ष चंद्रशेखर चंद्राकर ने क्या कहा ,देखे एक नजर

नगर पालिका में दिया होगा।आवेदन दिया था फिर उसके बाद सूचना का अधिकार लगाकर उसको पेपर भी करवाए थे। वह बोले कि यहां कार्रवाई नहीं होगी तो मैं ऊपर भी शिकायत करूंगा। ठीक है आवक जावक में रहता है मै देख लूंगा।चार पांच बार इंजीनियर को भेजते हो गया और दोनो संतुष्ट नहीं हो रहे है।सामने वाला बोलता है की मेरा जगह छोटा होगा।सामने वाले का जगह लगानी है और ये पहले से लगा दिया चौखट पांच फीट का।पहले तीन फीट में रास्ता सही था। अब ये मन मुताबिक रास्ता मांगता है तो कौन देगा।ये वाली समस्या है ,इसको भी थोड़ा झुककर चलना चाहिए।सामने वाला बोलता है की मै अपना जगह क्यों दूंगा।मै इंजीनियर को चार पांच बार भेज चुका हु।लेकिन ये पांच फुट जगह चाहिए बोलता है,थोड़ा बहुत 19-20 के लिए तैयार हो तब न।नाली पहले से परमानेंट बना हुआ है।सामने वाला बोल रहा है की मेरा जगह है मै नही दूंगा करके।दोनो पक्ष समझौता करके चलेगा तब बनेगा।इंजीनियर को और भेजूंगा।मकान बन रहा है तभी समस्या आया है।और उनकी मिसेज हर चीज को रिकॉर्डिंग करती है।ये भी तो बहुत बड़ी समस्या है। वहा समझौता के लिए बुलाए थे तो कुछ लडको को बुलाकर रिकॉर्डिंग चालू कर दिए।तो सीएमओ साहब बोले की बंद करो रिकॉर्डिंग,कोई जनरल बात करे तो हर चीज को रिकॉर्डिंग करती हैं। ऐसा है की कुछ बोल भी नहीं सकते।ठीक है मै एक बार और इंजीनियर को भेजकर मामले का निराकरण करने का प्रयास करता हु।

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