8 माह से बेघर यादव परिवार शासकीय भवन में लिए हुए है शरण,बारिश में मकान गिरे हुए 8 माह हो गया पर अब तक नहीं मिला है मुआवजा

  • शासन की आवास योजना की खुल रही है पोल,पात्र हितग्राहियों को नहीं मिल पा रहा है योजना का लाभ

परमेश्वर कुमार साहू,गरियाबंद

मामला छुरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुरूद का है।जहां एक यादव परिवार का पिछले 8 माह पूर्व बारिश एवं बाढ़ की वजह से उनका घर पानी में डूब गया और गिर गया।जिसके कारण यादव परिवार को ग्राम पंचायत के स्कूल प्रांगण स्थित महिला समूह के भवन में पिछले 8 माह से निवास करना पड़ रहा है।उक्त परिवार पिछले 13 वर्षों से ग्राम कुरुद मे निवासरत है इनके पास अब तक आवास भी नहीं है। 8 सदस्य इस परिवार की मुखिया राम गुलाल यादव,उमाबाई,चैन यादव यामिनी यादव,राधाबाई ,संतोष ,उमेंद व 15 दिन की एक बच्ची कुमारी पूजा हैं।इस पीड़ित परिवार को अब तक उसके घर बह जाने और गिर जाने का मुआवजा तक नहीं मिला पाया है।जबकि पटवारी द्वारा 8 माह पहले जांच कर मुआवजे के लिए प्रकरण बनाकर दिया जा चुका है बावजूद इसके इस परिवार को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।जो जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
वही पीड़ित परिवार के पास रोजगार गारंटी में जाने के लिए जॉब कार्ड भी नहीं है। 13 साल यह यादव परिवार केवल पौनी पसारी से ही अपना जीवन यापन और गुजर-बसर करते आ रहा है।

बता दें कि ग्राम पंचायत कुरूद में रसूखदारो को सभी योजनाओं को लाभ मिलता है पर गरीब परिवारों को ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है जो उसके हकदार है। माना कि ग्राम पंचायत ने उस परिवार को रहने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन अंतर्गत ग्राम संगठन के भवन को दिया गया है पर जाने क्यो अब बिहान की महिलाएं भी इस पीड़ित परिवार को 2 महीने का अल्टीमेंटम
दिए हैं और सरकारी भवन खाली करने बोल दिया है। ऐसे में पीड़ित परिवार की महिला मुखिया उमा बाई यादव ने बताई कि इस बारिश और ठंड के मौसम में 15 दिन की बच्ची को लेकर हम किसके घर में शरण लेंगे अब हमें चिंता सताने लगी है। लगभग 13 साल से इस गांव में पौनी पसारी से परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं ,ग्राम पंचायत से मांग की है कि हमें आवास भवन या घर बनाने के लिए जगह दी जाए । इसके व्यस्क सदस्य ग्राम पंचायत में मतदान तो कर सकता है पर उसका राशन कार्ड ग्राम गाड़ाघाट के हैं,अभी परिवार राशन लेने दूसरे ग्राम पंचायत जाता है और मतदान दूसरे ग्राम पंचायत में पड़ता है। इस तरह इस परिवार के पास खुद का ना घर है कोई काम धंधा। ऐसे में समाज के ठेकेदार और समाज सेवक कहां चले गए जो अपने अपने समाज को लेकर बड़ी बड़ी बाते करते है और सामाजिक संस्था द्वारा बड़ी-बड़ी बात की जाती है।जो धरातल पर नजर नहीं आता ।वही ग्राम पंचायत द्वारा विकास के बड़े-बड़े ढिंढोरा पीटा जाता है पर जमीनी हकीकत यह है कि गरीबों का कोई विकास नहीं हुआ ना हि उन्हे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।जिसका उदाहरण यहां गरीब यादव परिवार दे रहा है।

वर्जन

इस यादव परिवार का घर बाढ मे गिर गया था।हम लोगों ने सरकारी भवन रहने के लिए व्यवस्था बनाए हैं।
यादव परिवार के पास राशन कार्ड पंचायत गाड़ाघाट से बना है। इस गांव में बहुत साल से पौनी पसारी का काम कर रहा है।अभी उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाए हैं। राशन कार्ड ग्राम पंचायत कुरूद में बनाने के लिए मैं स्वयं खाद्य विभाग शाखा गया था। मुआवजा प्रकरण बनाकर पटवारी जांच किया है।

लुमेश कवर ,सरपंच ग्राम पंचायत कुरूद

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