ज्योति ,प्रज्ञा व शांति नाम तो ऐसा भक्ति भाव पूर्ण, पर काम पूरा फर्जी, इनके कारनामों को सुनकर आप भी हो जायेंगे हैरान

  • स्वास्थ विभाग के संरक्षण में अवैध पैथालाजी लैब और क्लीनिक का हो रहा है संचालन

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। यह तीनों नाम ऐसा है जो भक्ति भाव और संस्कारों के नाम से जाना जाता है। जिसमें ज्योति पैथोलॉजी लैब ,प्रज्ञा पैथोलॉजी लैब वा शांति पैथोलॉजी लैब तीनों लेब पांडुका में संचालित है।जो अपने नाम के अनुरूप काम करते नहीं दिख रहे हैं यह तीनों लैब पूर्ण तरीके से फर्जी है जो न तो किसी भी प्रकार से विभाग से पंजीकृत है और न ही इनके पास कोई वैध दस्तावेज है।क्योंकि आरटीआई से जो खुलासा हुआ है वो चौकाने वाला है ,जिले भर में सैकड़ों पैथालजी लैब संचालित है।लेकिन केवल चार पांच लैब ही पंजीकृत है।बाकी कइयों दर्जन पैथालाजी लैब विभाग की सह पर और देखरेख में खुलेआम संचालित हो रहा हैं।विभागीय संरक्षण के चलते अवैध क्लीनिक व पैथालाजी संचालकों का गोरखधंधा जिले में इन दिनों खूब फल फूल रहा है।वही पाण्डुका के इन तीनो लैब कई सालो से बिना पंजीयन के संचालित हो रहा है।इसके अलावा जो भी लेब है । उनके पास किसी प्रकार का कोई दस्तावेज नहीं है और स्वास्थ्य विभाग के विभागीय संरक्षण के चलते सालों से यह फर्जी लैब बेखौफ संचालित हो रहे हैं।

बता दें कि क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। ऐसे में पांडुका में शांति पैथोलॉजी लैब जो फर्जी है साथ ही यहां के जो झोलाछाप डॉक्टर है घर में इलाज करते हैं। जो पहले लैब में क्लीनिक सजाकर इलाज करता था और जब इन बातों को लेकर खबर प्रकाशन किया गया था तब स्वस्थ विभाग की टीम ने खानापूर्ति के लिए कार्रवाई कर छोड़ दिया।लेकिन कुछ दिनों बाद विभाग ने इनके सील लगे क्लीनिक को खोल दिया जो अब गांधी चौक पांडुका स्थित अपने निवास में झोलाछाप डाक्टरी का फिर दुकान सजाकर इलाज शुरू कर दिया है और पांडुका चारों धाम चौक में लेब जो सालों से संचालित हो रहा था वह भी बदस्तूर जारी है इसी तरह सिरकट्टी मार्ग और बस स्टैंड में प्रज्ञा लैब और ज्योति ले भी संचालित हो रही है। ऐसा नहीं है कि इन सब बातों की जानकारी जिले के स्वास्थ विभाग के बड़े अधिकारी, नोडल अधिकारी जिले के जांच टीम को नहीं होगी। सब जानते हुए भी जाने क्यों जानबूझकर इन पर कार्यवाही नहीं करते ।आम जानता से अधिक फीस लेने से आम लोग त्रस्त है पर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि वह तो कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते हैं।जिन्हें आम जनता से कोई सरोकार नहीं है।

इस मामले को लेकर डॉक्टर ए. के. हुमने नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट जिला गरियाबंद से पूछा गया तो उन्होंने केवल ठीक है ठीक है देख लेते हैं कहा ।

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