समाज सेवक बनने की जिले में मची होड़ ,जनहित के मुद्दे नहीं उठा पा रहे हैं आयोजनों में बटोर रहे वाहवाही

  • जिले में नेताओ की बन गई है यही परंपरा, मंशा राजनितिक लाभ लेने की

परमेश्वर कुमार साहू@गरियाबंद। जिले में इन दिनों अपने आपको समाज सेवक बताने की एक होड़ सी मच गई है। यह लोग अपने आपको समाज सेवक बता कर आए दिन सोशल मीडिया एवं अखबारों में सुर्खियां बटोर रहे हैं।लेकिन असल में जमीनि हकीकत की बात की जाए तो यह समाज सेवक किसी भी प्रकार के जनहित एवं सामाजिक मुद्दे नहीं उठाते केवल गांव में होने वाले क्रिकेट ,कबड्डी ,खो-खो , बैठक , रामायण ,जस गीत एवं शादी-विवाह , कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपने आपको समाज सेवक बताते हैं ।

बताना लाजिमी होगा कि आने वाले कुछ सालों में त्रीस्तरीय पंचायत चुनाव ,विधानसभा एवं लोकसभा जैसे चुनाव होने हैं वैसे भी यह समाज सेवक अपने राजनीतिक लाभ लेने के लिए कुछ समाज सेवक का चोला पहने सामाज के बीच में जाते हैं। कार्यक्रमों में अपने आप को किसी समाज सेवक की तरह पेश करते हैं लेकिन ये असली में समाज सेवक नहीं होते क्योंकि इनके द्वारा आज तक जिला व जनपद तथा पंचयात क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल ,सड़क जैसे कई मुद्दे है जिसे इनके द्वारा आज तक नहीं उठाए गए हैं ।ऐसे मे ये कैसे अपने आप को समाज सेवक व आम जनता हितैषी बताते है ।जो आमजनों से किसी प्रकार का सरोकार नही रखते हैं ।ग्रामीण अंचलों में आज भी इतनी समस्याएं भरी पड़ी है की इसकाे उठाने वाला कोई नहीं है खास कर जानता के चुने हुय जन प्रतिनिधि कुछ नही कर पा रहे ।जिन्हे कम से कम शासन द्वारा फंड मुहैय्या होता है ।वो ध्यान नही दे रहे ऐसे मे ये समाज सेवक कहा से आम जनता का भला कर पाएंगे इसी वजह से इन दिनों जिले के राजिम से लेकर देवभोग तक आपको ऐसे बहुत सारे समाज सेवक मिल जाएंगे। जो राजनितिक उल्लू सीधा करने व अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए समाज सेवा का नाटक कर खूब सुर्खिया बटोर रहे है। जो कभी- कभी रक्तदान शिविर का आयोजन कर या फिर मरीजों को अस्पतालो मे दो चार केला देकर या एक दो पेड़ पौधा लगाकर सीजन के हिसाब से काम करते है और अपने चेला चपाटीयो से फोटो खिचाकर सोशल मीडिया और अखबारों मे खूब वायरल करते है ।जिससे आम जानता को लगता है की ये बहुत बड़ा नेता है। । इसी का फायदा उठाते हुए यहां तथाकथित समाज सेवक शासकीय कार्यालयों में धाक जमाते हैं और वहां से अपना चंदा इकट्ठा करते हैं ।इनसे ही गुजर-बसर होता है और यही इनका आय का स्रोत है। इन्हीं चंदे के पैसे से क्रिकेट कबड्डी खो-खो व धार्मिक आयोजनों के आयोजक समिति को देते हैं ।इनसे इनका रुतबा और बढ़ जाता है वा चुनाव के समय अपना उल्लू सीधा कर चुनाव में प्रतिनिधित्व करता है या फिर मोटी रकम लेकर बैठ जाता है।
जिनसे ऐसे समाज सेवकों से आम जनता को दूर रहने की आवश्यकता है और समझना है कि कहीं इनके बहकावे में ना आए।जिले में कई ऐसे नेता और जनप्रतिनिधि है जो इस प्रकार समाज सेवक बनने का ढिढोरा पीटकर आम जनता को बेवकूफ बनाने में लगे है।जो किसी से छुपा नहीं है।

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